मुरैना(मध्‍यप्रदेश)। रामप्रसाद बिस्मिल के नाम पर 3 करोड़ का संग्रहालय उनके पैतृक गांव बरवाई के जिला मुख्यालय मुरैना में बनाया गया है। इस भव्य पंडित रामप्रसाद बिस्मिल संग्रहालय में बिस्मिल से जुड़ी सिर्फ दो ही चीज हैं। एक, उनका नाम जो कि संग्रहालय के बाहर लिखवाया गया है। दूसरा, उनका संगेमरमर से बना बुत, जो संग्रहालय के प्रवेश द्वार के सामने पत्थर की छतरी के नीचे शीशा घर में बंद है। यहां बिस्मिल का रचित साहित्य लाया जाना था, उनसे जुड़े कुछ दस्तावेजों की प्रतिलिपी और अन्य जानकारियां भी रखी जानी थीं।

इसे मजाक ही कहा जाएगा कि पूरे संग्रहालय में साहित्य या दस्तावेज तो दूर बिस्मिल का जीवन परिचय तक नहीं लगाया गया है। करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से बने पंडित रामप्रसाद बिस्मिल शहीद संग्रहालय का लोकार्पण इसी साल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। मुरैना को लगातार इस बात के लिए प्रचारित किया जाता रहा है कि मुरैना जिले का बरवाई गांव पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का पैतृक गांव है।

संग्रहालय निर्माण के समय इस बात की घोषणा की गई थी कि यहां पर देश में उपलब्ध रामप्रसाद बिस्मिल के साहित्य की मूल प्रतियां लाने की कोशिश होगी। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो कम से कम इसकी छायाप्रति रखी जाएगी, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया है। रामप्रसाद बिस्मिल का मुरैना से क्या संबंध है इस बात को बताने वाला भी कोई दस्तावेज यहां नहीं है। उनका जीवन परिचय अथवा उनका कोई ओरीजनल चित्र भी संग्रहालय में नहीं है।

बिस्मिल की आठ मूल पुस्तक और आधा दर्जन अनुवाद पुस्तकों में से कोई नहीं

भारत में उपलब्ध पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की कुल आठ मूल पुस्तकों और बांग्ला व अंग्रेजी पुस्तकों का अनुवाद कर लिखी गईं पुस्तकों में से एक की भी मूल, छायाप्रति या पुन: प्रकाशित प्रति संग्रहालय में नहीं है। यहां तक कि इसकी सूची तक यहां नहीं है।

यह हैं बिस्मिल की प्रसिद्ध रचनाएं

-रामप्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा लिखी, जिसे काकोरी कांड नामक पुस्तक में निजी जीवन की एक छटा के नाम से प्रकाशित किया गया है।

-उनका उपन्यास 'बोल्शेविकों की करतूत" लिखा जो बांग्ला भाषा की किताब 'निहिलिस्ट रहस्य" का अनुवाद थी।

- बांग्ला भाषा की पुस्तक 'यौगिक साधन का" का अनुवाद भी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल ने फरार रहते हुए हिंदी में किया।

-1918 में प्रकाशित अंग्रेजी किताब 'दि ग्रेंडमदर ऑफ रसियन रिवोल्यूशन" का हिंद अनुवाद लिखा।

-बिस्मिल की गजल में 'सरफरोशी की तमन्‍ना", 'जज्बा ए शहीद", 'जिंदगी का राज", 'बिस्मिल की तड़प" प्रमुख हैं।

- '"स्वदेशी रंग", 'चीनी षड्यंत्र", 'तपोनिष्ठ अरविंद घोष की कारावास कहानी", 'अशफाक की याद में", 'सोनाखान के अमर शहीद वीरनारायण सिंह", 'जनरल जार्ज वाशिंगटन", 'अमरीका कैसे स्वाधीन हुआ" पुस्तकें प्रमुख मूल पुस्तकें हैं।

क्या है मुरैना से बिस्मिल का संबंध

-रामप्रसाद बिस्मिल के दादा नारायण लाल मुरैना के बरबाई में रहते थे। यहां पर रामप्रसाद बिस्मिल के पिता मुरलीधर और चाचा कल्याणमल का जन्म हुआ। बिस्मिल के दादा अपने दोनों बेटों सहित पारिवारिक कलह के चलते गांव छोड़ गए।

-रामप्रसाद बिस्मिल के दादा के भाई अमान सिंह और समान सिंह के वंशज यहां अभी भी रहते हैं।

-मैनपुरी षणयंत्र के दौरान बिस्मिल फरार रहे और लंबे समय तक बरबाई के बीहड़ों में किसान बनकर रहे।

-बरबाई में आज भी बिस्मिल के बचे हुए परिजन निवास कर रहे हैं।

बिस्मिल का साहित्य लाने का प्रयास किया जा रहा है। यह सही है कि संग्रहालय में बिस्मिल और मुरैना का संबंध बताने वाली अथवा अन्य कोई जानकारी देने वाली चीज नहीं है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकरियों से बात की जाएगी। अशोक शर्मा, प्रभारी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल संग्रहालय मुरैना

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