संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विसेज की 86-सदस्यीय टीम अब अमरनाथ यात्रा में अपनी सेवाएं देगी। केदारनाथ धाम से यह टीम लौट आई है। इस टीम ने लगभग डेढ़ माह की यात्रा के दौरान इमरजेंसी में आए 1290 मरीजों की जान बचाई। जबकि, कुल 41 हजार यात्रियों का इलाज कर उन्हें दवाई दीं।

केदारनाथ के कपाट खुलने से दो दिन पहले सिक्स सिग्मा की 86-सदस्यीय टीम केदारनाथ पहुंच गई थी। इस अवधि में टीम ने गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ तक पैदल मार्ग के हर पड़ाव पर यात्रियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बाद भी टीम ने केदारनाथ में यात्रियों को उम्दा सेवाएं दीं। सिक्स सिग्मा के निदेशक डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि 43 दिनों के भीतर करीब 2,567 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। जबकि, करीब 41 हजार यात्रियों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दवाइयां मुहैया कराई गईं।

टीम ने इस बार 37 मरीजों को केदारनाथ में उपचार के बाद हेलीकॉप्टर से हायर सेंटर भिजवाया । टीम के सभी विशेषज्ञ चिकित्सक अब अमरनाथ यात्रा में अपनी सेवाएं देंगे। जबकि, केदारनाथ में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी। उधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने भी सिक्स सिग्मा मेडिकल टीम के योगदान की सराहना की है।

2009 में हुआ था सिक्स सिग्मा टीम का गठन

2009 में सिक्स सिग्मा हाई ऑल्टीट्यूड मेडिकल सर्विस की स्थापना नई दिल्ली के द्वारिका में हुई थी। इस मेडिकल सर्विस में 328 हॉस्पीटल है, जिनसे अर्जित आय से वह देश के विभिन्न स्थानों पर मेडिकल सर्विस के साथ ही रेस्क्यू का कार्य भी करती है। लगभग 86 सदस्यों की टीम में आर्मी से रिटायर्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी रखा गया है। केदारनाथ आपदा के दौरान भी मेडिकल टीम ने आपदा में फंसे लोगों को रेस्क्यू के साथ ही मेडिकल सहायता भी दी थी।

संस्था प्रतिवर्ष निस्वार्थ भाव से केदारनाथ, तुंगनाथ, मदमहेश्वर, हेमकुंड और अमरनाथ समेत कई स्थानों पर निशुल्क स्वास्थ्य सेवा देती है। सिक्स सिग्मा के सीईओ एवं मेडिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि यह मेडिकल सर्विस निःस्वार्थ भाव से विभिन्न स्थानों पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले में संस्था माउंटेन मेडिसन इंस्टीट्यूट विकसित करने की योजना पर काम कर रही है, इसके लिए उत्तराखंड सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

Posted By: Yogendra Sharma

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