छेड़िया (बालोद)। ब्लाक मुख्यालय से पांच किमी दूर ग्राम छेड़िया में स्थित मामा-भांजा का मंदिर इन दिनों आस्था का केंद्र बना है। मान्यता है कि इस मंदिर में ग्रामीणों की मांगी हर मन्नातें पूरी होती है। इसके अलावा ग्रामीण खोई हुई वस्तु पुनः पाने के लिए यहां पूजा करने आते हैं। जिसके कारण आसपास के ग्रामीण भी यहां श्रद्धा भक्ति भाव से मंदिर मत्था टेकने पहुंचते हैं।

मंदिर ग्राम भरदा से धोबनपुरी के मध्य मुख्य मार्ग में स्थित है। जिसके कारण यहां से गुजरने वाले राहगीर भी मंदिर में दर्शन करके ही आगे बढ़ते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मामा-भांचा का आशीर्वाद होने के कारण ही ग्राम में आज तक कोई प्राकृतिक आपदा नहीं आई है। मंदिर ग्रामीणों की मनोकामना पूरा करने के साथ ग्राम की रक्षा भी करता है।

ग्राम के बड़े बुजुर्गों के अनुसार 1964-65 के पूर्व ग्राम छेड़िया सहित आसपास बीहड़ जंगल था। एक दिन मामा और भांजा दोनों अपने-अलग-अलग घोड़े पर सवार होकर जंगल का भ्रमण कर रहे थे। तभी दोनों को एक बावली दिखाई दी। बावली में स्वच्छ पानी देखकर दातून कर रहे थे तभी सामने से आ रहे खतरनाक वन्य प्राणी को देखकर दोनो घबरा गए और बावली में कूद गये। रात्रि में ग्राम के बड़े बुजुर्गो व बैगा को घटनाक्रम की जानकारी दी। स्वप्न में मामा-भांजा ने ये भी बताया कि हम दोनो की मूर्ति बनाकर सधो भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करोगे तो ग्रामीणों की हर मुरादें पूरी होगी तब से ग्रामीण लगातार पूजा करते आ रहे हैं।

बावली का अस्तित्व खतरे में

बावली में कूदने से पहले मामा-भांजा ने बावली के पास अपना नीम का दातून खोंस दिया था। जो वर्तमान मे विशालकाय पेड़ बन गया है। मंदिर एवं पेड़ की शीतलता देख यहां से गुजरने वाले ग्रामीण आराम करने मजबूर हो जाते है। बावली आज भी मंदिर के पीछे मौजूद है लेकिन उसका अस्तित्व बिगड़ता जा रहा है।

ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण

पूर्व में बुजुर्गो ने स्थान पर पाषाण प्रतिमा को मामा भांजा स्वरूप मानकर पूजा कर रहे थे। मंदिर नहीं था। ऐसे में धूप-बारिश से मूर्ति को भी नुकसान हो रहा था तब ग्रामीणों ने मंदिर का निर्माण करने निर्णय लिया और ग्रामीणों ने सहयोग कर भव्य मंदिर का निर्माण करा दिया। इससे मंदिर का सुंदरता दोगुनी हो गई। जिस स्थान पर मामा भांचा का मंदिर है उसके पास ही ग्रामीणों का ईष्टदेव लिंगोदेव, माड़ियादेव, अखरादेवता का पाषाण प्रतिमा है जो खुले स्थान में है इनके साथ अगर पर्यटन विभाग बावली का भी संरक्षण करे तो ग्राम छेड़िया को भी धार्मिक के साथ पर्यटन क्षेत्र का भी पहचान मिल जाएगा।