किश्तवाड़। मचैल माता की पवित्र छड़ी यात्रा गुरुवार को पाडर स्थित माता के दरबार पहुंच गई। यात्रा में सैकड़ों भक्त शामिल हुए। इससे पहले 18 अगस्त को जम्मू से चलकर किश्तवाड़ होते हुए मचैल पहुंचने पर लोगों ने पवित्र छड़ी का भव्य स्वागत किया था। इसके बाद विधिवत रूप से छड़ी की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर लोगों ने परंपरा के मुताबिक कुड नृत्य भी किया।

भक्तों ने मचैल चंडी माता के दर्शन किए। छड़ी यात्रा में शामिल भक्तों ने मंदिर में स्थापित पवित्र छड़ी के त्रिशूल को माथा टेका।

बता दें, पिछले साल 22 अगस्त को छड़ी के पहुंचने पर संस्था के दो गुटों में विवाद हो गया था। इसके बाद संस्था के संस्थापक और यात्रा को शुरू करने वाले ठाकुर कुलबीर सिह ने पवित्र छड़ी का त्रिशूल मंदिर से वापस नहीं लाया। बाद में त्रिशूल को स्थायी तौर पर मंदिर में ही स्थापित कर दिया गया।

इस बार छड़ी यात्रा के लिए जम्मू में रहने वाले मूल रूप से डोडा निवासी राजू जैन ने नया त्रिशूल बनवाकर उसके साथ छड़ी यात्रा को जम्मू से रवाना किया। सर्वशक्ति सेवा संस्था के प्रधान नेकराम मन्हास ने बताया कि इस बार छड़ी यात्रा को धूमधाम से निकालने का फैसला किया गया था। इसके लिए हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित ज्वाला जी माता मंदिर से माता की दिव्य जोत विशेष रूप से लाई गई।

छड़ी का त्रिशूल जम्मू से चलाया गया, लेकिन राज्य में बीते दिनों अनुच्छेद-370 समाप्त होने के बाद प्रशासन ने यात्रा को धूमधाम से संचालित करने की अनुमति नहीं दी। इसी कारण छड़ी यात्रा साधारण तरीके से थोड़े श्रद्धालुओं के साथ मंदिर पहुंची।

Posted By: Arvind Dubey

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