पूरी दुनिया पर कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है। सभी दूर इससे बचने के उपाय खोजे जा रहे हैं। भारत में ज्योषित विज्ञान भी कोरोना वायरस पर अध्ययन कर रहा है। ज्योतिष में इस संकट को विषाणुजनित महामारी का संकट कहा गया है जो शनि और सूर्य के योग से खड़ा हुआ है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि यह संकट इस संवत्सर 2077 में बुध और चंद्र के योग से खत्म होगा। यानी 14 अप्रैल के बाद कोरोना की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। यह भी अजब संयोग है कि 21 दिन का लॉकडाउन भी तभी समाप्त हो रहा है।

भारतीय पंचांगों में लिखा है सब कुछ

पिछले साल के श्री हृषिकेश हिंदू पंचांग में पेज तीन पर साफ-साफ लिखा है कि संवत्सर 2076 के दौरान किसी विषाणुजनित महामारी का संकट आएगा। श्री हृषिकेश पंचांग के साथ ही पं.बापूदेव शास्त्री दृकसिद्ध पंचांग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय पंचांग, श्रीविश्र्व पंचांग, गणेश आपा जी पंचांग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पंचांग जैसे कई प्रतिष्ठित पंचांगों में परिधावी संवत्सर में संवत्सर फल में महामारी की बात लिखी गई थी।

पिछला संवत्सर : राजा शनि और मंत्री सूर्य

ज्योतिर्विद आचार्य पवन त्रिपाठी के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में नए संवत्सर की शुरुआत सप्ताह के जिस दिन से होती है, वही उस वर्ष का राजा होता है और इसी आधार पर उस वर्ष के फल निर्धारित होते हैं। चूंकि परिधावी नामक पिछला संवत्सर शनिवार को शुरू हुआ था, इसलिए इसके राजा शनि और मंत्री सूर्य थे। इनके कारण ही दुनिया को कोरोना वायरस जैसी महामारी से जुझना पड़ रहा है।

नया संवत्सर: घटने लगेगा कोरोना का असर

आचार्य त्रिपाठी आगे बताते हैं कि नया संवत्सर 2077 बुधवार, 25 मार्च 2020 से हुआ है। प्रमादी नामक इस संवत्सर का राजा बुध है। चंद्र यानी सोम इसके मंत्री हैं। 14 अप्रैल, 2020 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही इस महामारी की तीव्रता कम होने लग जाएगी।

पंडित गोपीकांत झा और संपादनकर्ता पं. मुक्ति कुमार झा के संयोजकत्व में निकलने वाले मैथिली पंचांग के वर्ष 2020 के भविष्य फल में साल के शुरू से ही कई प्रकार के दुखों की आशंका जताई गई है। साथ ही शारीरिक परेशानियों का भी जिक्र है। यहां भी लिखा गया है कि वैशाख माह में इनकी तीव्रता में कमी आएगी।

पढ़िए क्या कहते हैं ज्योतिष के जानकार

रूपेश ठाकुर प्रसाद पंचांग में लिखा गया है कि जनवरी में रोग और शत्रु से राष्ट्र में परेशानी पैदा होगी। फरवरी में किसी महामारी का प्रकोप होगा। अप्रैल के लिए कहा गया कि प्राकृतिक प्रकोप से हानि का प्रभाव यहां व्यापार के क्षेत्र में भी पड़ेगा।

मिथिला के प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. प्रभात कुमार वर्मा के अनुसार, भारत में 30 मार्च के बाद महामारी का प्रकोप कम होगा। हालांकि, विश्व स्तर पर यह सितंबर में पूरी तरह नियंत्रित होगा।

वहीं कामेश्र्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्र्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और विश्र्वविद्यालय पंचांग के प्रधान संपादक सेवानिवृत्त पंडित रामचंद्र झा का मानना है कि 13 अप्रैल को मेष संक्रांति है। इसके बाद सूर्य का उच्च राशि में गमन होगा। तब शनि की दृष्टि सूर्य से हट जाएगी। ऐसे में 13 अप्रैल के बाद हमें स्थितियां अनुकूल होने की उम्मीद करनी चाहिए।

इसी तरहग पंडित रामचंद्र झा कहते हैं, बीते साल 26 नवंबर से दिसंबर के आखिर तक षडग्रह योग बना था, जो अनिष्टकारी था। जनवरी 2020 में भी इनका योग बरकरार रहा। मार्च में 5 शनिवार होने के कारण यह दोषकारक हुआ है। यह स्थिति 15 मार्च से 15 अप्रैल तक की है। 16 फरवरी को शनि का राशि परिवर्तन हुआ। वे धनु से मकर राशि में आ गए। वहीं 17 मार्च को बृहस्पति मकर राशि में आ गए। इस तरह राहु-केतु का संयोग और दृष्टि जो धनु राशि में थी, इससे दोनों ग्रह आगे बढ़ गए। मंगल इस वर्ष का मंत्री है। मंगल का राशि परिवर्तन 26 मार्च से है। इसलिए स्थिति अनुकूल होने की संभावना है।

Posted By: Arvind Dubey