आज 5 जून को देशभर में ईद का जश्न मनाया जा रहा है। रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के बाद ईद-उल-फितर का यह त्योहार मनाया जा रहा है। इस त्योहार की विशेषता इबादत, भोज और मेल-मिलाप है। इसे खुशी का दिन माना जाता है। फितर शब्द अरबी के ‘फतर’ शब्द से बना। जिसका अर्थ होता है टूटना। नमाज से पहले सभी अनुयायी कुरान के अनुसार, गरीबों को अनाज की नियत मात्रा दान देने की रस्म निभाते हैं, जिसे फितर देना कहा जाता है। फितर या एक धर्मार्थ उपहार है, जो रोजा तोड़ने पर दी जाती है।

कुरान के अनुसार पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब रमजान के पवित्र महीने में रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं तो अल्लाह एक दिन अपने उस इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को 'ईद' कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल-फितर का नाम देते हैं।

ईद-उल-फितर के दिन सुबह उठते ही नहाना, नए कपड़े पहनना,सुगंधित इत्र लगाना, ईदगाह जाने से पहले खजूर खाया जाता है। मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए यह अवसर भोज और आनंद का होता है।

सबसे पहली ईद

सबसे पहली ईद को लेकर माना जाता है कि सन् 624 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद ने मनाई थी। इसी ईद को ईद उल-फितर के नाम से पहचाना गया। ये ईद पैगंबर हजरत मोहम्मद ने बद्र के युद्ध में जीत की खुशी में मनाई थी। इस्लामिक प्रथा के मुताबिक ईद की नमाज अदा करने से पहले हर मुस्लिम व्यक्ति को दान यानी जकात व फितरे देना जरूरी होता है।

ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार दसवें महीने यानी शव्वाल के पहले दिन यह त्योहार मनाया जाता है। जब तक चांद नहीं दिखे तब तक रमजान का महीना खत्म नहीं माना जाता। आखिरी दिन चांद दिख जाने पर रमजान के अगले दिन ईद मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन हजरत मुहम्मद मक्का शहर से मदीना के लिए निकले थे।

Posted By: Sonal Sharma

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