Jagannath Rath Yatra 2020: देशभर में कोरोना वायरस का प्रकोप है, लॉकडाउन लगा हुआ है। जो लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं उनको क्वॉरेंटाइन में भेजा जा रहा है लेकिन उड़ीसा के विश्व प्रसिद्ध भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर में महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के बीमार होने पर क्वॉरेंटाइन यानी एकांतवास ने चले जाने की प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। मान्यता के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा के दिन अत्यधिक स्नान करने से मां प्रभु श्री जगन्नाथ जी को बुखार हो गया है। ऐसे में जन कल्याण के लिए भगवान श्री जगन्नाथ जी ने खुद को 15 दिन के लिए सबसे अलग कर लिया है यानी एकांतवास में चले गए हैं। परंपरा के मुताबिक अब महा प्रभु की गुप्त सेवा एकांतवास में की जाएगी और वहीं उनका इलाज किया जाएगा।

Lord Jagannath ने किया 108 घड़ा जल से स्थान

इससे पहले स्थान पूर्णिमा के दिन महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी को 108 घड़ा सुगंधित जल के साथ स्नान करवाया गया। मान्यता है कि अत्यधिक स्नान से महाप्रभु बीमार पड़ गए हैं। उन्हें बुखार हो गया है और उनका यह संक्रमण दूसरों में न फैले, इस जनकल्याण की भावना के साथ में 15 दिन के लिए एकांतवास में जा रहे हैं। अब काढ़ा पिलाकर उनका इलाज किया जाएगा।

Lord Jagannath के स्थान पर करें अलारनाथ का दर्शन

एक और दिलचस्प मान्यता यह है कि जब भगवान जगन्नाथ एकांतवास में हैं, तब भक्त पूरी से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर स्थित ब्रह्मगिरि में अलारनाथ का दर्शन करते हैं। मान्यता है कि अलारनाथ का दर्शन करने से प्रभु श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के बराबर पुण्य मिलता है। इस तरह अगले 15 दिन अलारनाथ में भक्तों का तांता लगा रहेगा। हालांकि लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए यहां भक्त दर्शन करवाएं जाएंगे। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, यह मंदिर भी 8 जून, सोमवार से खुलेगा।

Posted By: Arvind Dubey