कोंडागांव। अपने अनोखी परंपरा, संस्कृति, देवी देवताओं की धार्मिक आस्था के लिए के लिए्र प्रख्यात बस्तर की खूबसूरत वादियों में सदियों पुरानी एक ऐसी गुफा विद्यमान है। जहां स्थित शिवलिंग को भगवान शिव का स्त्री रूप लिंगेश्वरी माता के रूप में पूजा होती आ रही है। इस गुफा का पट साल में एक ही दिन खुलता है वहीं मान्यता है कि यहां दर्शन कर खीरे का प्रसाद खाने से निःसंतान दंपतीयों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस वजह से यहां साल में एक निश्चित दिन श्रद्धालुओं का मेला लगता है जिसमें अपनी मनोकामना लेकर और मन्नत पूरी होने पर सिर झुकाने दूर-दराज से दंपतीयां आते हैं।

11 सितम्बर को खुलेगा गुफा का द्वारजिला मुख्यालय कोंडागांव से लगभग 38 किमी की दूरी पर फरसगांव से बड़ेडोंगर मार्ग में ग्राम आलोर स्थित है। आलोर को बस्तर रियासत की प्राचीन कचहरी भी कहा जाता है। आलोर ग्राम के झांटीबंधपारा में स्थित पहाड़ी में एक पुरानी गुफा स्थित है जिसका द्वार वर्ष में सिर्फ एक ही दिन्र नयाखानी पर्व के बाद आने वाले प्रथम बुधवार को खुलता है। मंदिर समिति के महेश कुमार नाग ने बताया इस बार अंचल में निवासरत सर्व आदिवासी समाज द्वारा 7 सितंबर को नयाखानी पर्व मनाना तय हुआ है जिसके चलते प्रथम बुधवार 11 सितंबर को गुफा का प्रवेश द्वार खुलेगा।

विशाल चट्टान से बना स्तूपाकार है गुफा

ग्राम आलोर के उत्तर-पश्चिम दिशा में एक्र पहाड़ी्र में्र विशाल चट्टान से बना स्तूपाकार गुफा के अंदर शिवलिंग स्थित है जिसमें सुरंगनुमा प्रवेश द्वार से लेटते हुए गुफा के अंदर प्रवेश है। पूजा के लिये 15-20 लोग आराम से बैठ सकते हैं। गुफा के अंदर बीचोंबीच पत्थर से बना डेढ़ से दो फीट ऊंची शिवलिंग की आकृति स्थित है जिसे स्थानीय हल्बी बोली में तलिंगई आया लिंगई माता कहते हैं। शिवलिंग की आकृति साल दर साल धीरे धीरे बढ़ती जा रही है।

निःसंतान दंपतियों के लिए वरदान

क्षेत्रवासियों के बीच मान्यता है क्रि निःसंतान दंपतियों को यहां आकर मनौती मांगने से संतान सुख की प्राप्ति होती है जिसके चलते राज्य के्रसाथ देश के विभिन्न हिस्सों ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, दिल्ली जैसे राज्यों से भारी तादाद में निसंतान दंपती यहां पहुंचते हैं।

यहां संतान प्राप्ति की मनौती मांगने का तरीका भी अनोखा है। संतान की कामना लेकर पहुंचने वाले दंपतीयों को पूजन के दौरान्र खीरा चढ़ाना अनिवार्य है। उक्त खीरे को पुजारी प्रसाद स्वरूप दंपती को वापस करता है जिसे दंपती्रको नाखून से फाड़कर लिंग के समक्ष ही गुफा के अंदर कड़ुआ भाग सहित ग्रहण करना होता है। मनोकामना पूर्ण होने की स्थिति में दंपती दूसरे वर्ष्र्रपुत्र या पुत्री को लेकर दर्शन लाभ लेने आते हैं। मंदिर समिति की मानें तो लिंगई माता की कृपा से अब तक अनेक दंपती को संतान सुख की प्राप्ति हो चुकी है जिसका प्रमाण समिति के पास उपलब्ध पंजीयन के्रपुख्ता आंकड़े दर्शाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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