रायपुर। यदि अपना जीवन सार्थक करना हो और परिवार में खुशहाली लानी हो तो भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाएं। अपने माता-पिता, बुजुर्गों के आदेशों की अवहेलना न करें। सौतेली माता और पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करके श्रीराम ने राज्य सिंहासन त्यागकर वनवास जाने का फैसला किया। इतना बड़ा त्याग आज के जमाने में भला कौन पुत्र कर पाएगा। जो माता-पिता की सेवा करते हैं, वे साक्षात भगवान की सेवा करते हैं। उक्त विचार ऋषिकेश से पधारे संत मैथिलीशरण महाराज (भाईजी) ने प्रियदर्शिनी नगर में मानस पाठ के दौरान व्यक्त किया।

रितेश अग्रवाल एवं ऋचा अग्रवाल के निवास पर संगीतयम मानस पाठ में भक्तगण रामचरित मानस की चौपाइयों का गान कर रहे हैं। प्रत्येक चौपाई के साथ ही उसका अर्थ भक्तों को बतलाया जा रहा है ताकि मानस में दिए गए संदेशों को भक्त ग्रहण कर सकें। 23 अगस्त तक चलने वाले मानस पाठ में सुबह 8.30 बजे विधिवत पूजा के पश्चात संगीतमय गान करने भक्त पहुंच रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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