रायपर। संतान की लंबी उम्र, सुख-शांति, समृद्धि के लिए माताओं ने भादो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, सोमवार को श्रीगणेश बहुला चौथ का व्रत रखा। बछड़े वाली गाय की पूजा-अर्चना करके संतान की रक्षा की कामना की। दिन भर उपवास रखकर पूजा-अर्चना करके कथा सुनीं। इसके बाद उबला चना, उड़द मूंग से बना बड़ा, पपरिया खाकर व्रत खोला।

भगवान ने ली थी गाय की परीक्षा

महामाया मंदिर के पुजारी पं.मनोज शुक्ला ने बताया कि व्रत के संबंध में गाय- बछड़े की कथा प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि भादो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला नाम की गाय जंगल में चरने के लिए गई। जंगल में गाय को शेर ने घेर लिया और उसे मारना चाहा। तब गाय ने शेर से कहा कि सुबह से भूखे अपने बछड़े को वह दूध पिलाना चाहती है इसलिए कुछ समय के लिए मुझे छोड़ दो, मैं दूध पिलाकर वापस आ जाऊंगी।

गाय की विनती पर शेर ने उसे अपने बछड़े को दूध पिलाने जाने दिया। गाय जंगल से घर लौटी और उदास होकर बछड़े को दूध पिलाने लगी। हमेशा खुश रहने वाली मां को उदास देखकर बछड़े ने उदास होने का कारण पूछा तो गाय ने सब कुछ सच-सच बता दिया। मां की बात सुनकर बछड़े ने कहा कि मैं भी जीकर क्या करूंगा। दोनों शेर के पास पहुंचे। गाय ने कहा- पहले मुझे मारो तो बछड़ा बोला- नहीं, पहले मुझे मारो।

गाय और बछड़े की ममता देखकर शेर ने दोनों को छोड़ दिया। यह भी मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने बहुला गाय की परीक्षा लेने के लिए यह लीला रची थी। उसी समय से महिलाओं में भादो कृष्ण की चौथ के दिन व्रत रखकर गाय-बछड़े को पूजने की परंपरा शुरू हुई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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