नलखेड़ा (आगर-मालवा)। Navratri 2019 : मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले की नलखेड़ा तहसील में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है, एक ऐसा मंदिर जहां शक्ति के जागृत दर्शन होते हैं। यहां आकर भक्त के केवल कष्ट ही दूर नहीं होते बल्कि उसके शत्रुओं का नाश हो जाता है। माता के दरबार में बड़ी संख्या पर श्रद्धालु पहुंचते हैं। जहां आम दर्शनार्थी अपनी मनोकामना लेकर आते हैं वहीं नेता-अभिनेता और अन्य हस्तियां मुकदमों, महत्वपूर्ण मसलों और चुनावों में जीत की कामना लेकर आते हैं।

कौरवों पर जीत के लिए पांडवों ने यहां की थी पूजा

कम ही लोग जानते हैं कि महाभारतकाल में भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों के खिलाफ युद्ध में जीत के लिए पांडवों को पूजा करने का आदेश दिया था। जिसके बाद पांडवों ने यहां तपस्या की, फलस्वरूप यहां देवी शक्ति का प्राकट्य हुआ। माता ने पांडवों को कौरवों पर जीत का आशीर्वाद दिया था। पांडवों में बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर ने माता का आशीर्वाद पाने के बाद यहां मंदिर का निर्माण किया। मान्यता यह भी है कि माता बगलामुखी की मूर्ति स्वयंभू है। बताया जाता है कि ईस्वी सन् 1816 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया।

तांत्रिक पूजन से पूरी होती है हर मनोकामना

माता बगलामुखी का पूजन यूं तो आम लोग भी करते हैं, लेकिन माता की विशेष साधना तांत्रिक विधि से होती है। जिसके लिए नियमों में रहकर पूजन किया जाना जरूरी है। माता को पीले रंग से प्रसन्न किया जाता है। बगलामुखी के साधक विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं।

माता का पूजन करने के लिए पीले फूल, पीली मिठाई और पीले रंग की खाद्य सामग्री का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा चुनरी, मिठाई आदि पीले रंग की पूजन सामग्री भी भक्त चढ़ाते हैं। मां बगलामुखी शत्रु स्तंभन और शत्रु नाश की देवी मानी गई हैं। माता का पूजन हल्दी की गांठ की माला के माध्यम से भी किया जाता है। माता पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं, इस कारण उन्हें पीतांबरा भी कहा जाता है।

इसलिए पड़ा ऐसा नाम

माता का यह नाम उनके मुख के कारण पड़ा। माता का मुख तेजस्वी है। माता बगुले के समान मुखवाली और भक्तों को अभय देने वाली हैं। यहां देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत, तांत्रिक सहित देश-विदेश के कई श्रद्धालु पूजन अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं।

इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, सरस्वती, देवी चामुंडा, भगवान श्रीकृष्ण, श्री हनुमान, श्रीकाल भैरव एवं शिव परिवार भी विराजमान हैं। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक हैं बगलामुखी।

मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे खास हैं। भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं, जो क्रमश: दतिया (मप्र), कांगड़ा (हिमाचल) एवं नलखेड़ा जिला आगर (मप्र) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है। मप्र में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का एकमात्र यह मंदिर आगर जिले की तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है।

Posted By: Lav Gadkari

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