विजय सक्सेना, कुंभनगर। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर चल रहे अलौकिक कुंभ के दौरान अखाड़ों में कई तरह की परंपराएं भी निभाई जा रही हैं। यूं तो कुंभ मेला में ज्यादातर शिविरों में अन्न क्षेत्र चल रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन इन भंडारों के बीच कुंभ में एक ऐसा भोज भी चल रहा है, जिसमें संत-महात्माओं को चांदी की थाली में भोजन परोसा जाता है। यह है समष्टि भोज।

इस राजसी भोज में आमंत्रित संत-महात्माओं की देवताओं की तरह पूजा की जाती है। आरती उतारी जाती है। तरह-तरह के पकवान परोसे जाते हैं। दक्षिणा में मोटी रकम से लेकर चांदी के सिक्के तक दिए जाते हैं।

अखाड़ों में समष्टि भोज की परंपरा सैकड़ों बरस से चली आ रही है। अखाड़ों में छावनी प्रवेश के बाद पीठाधीश्वर की ओर से समष्टि भोज कराया जाता है। इसके बाद अखाड़ों के अन्य महामंडलेश्वरों की ओर से समष्टि भोज का आयोजन कराया जाता है। इसमें महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत से लेकर बड़ी संख्या में संत-महात्मा शामिल होते हैं।

समष्टि भोज के दौरान महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत समेत अखाड़ों के पदाधिकारियों के बीच वेस्टी बैठक और समष्टि बैठकें भी होती हैं। वेस्टी बैठक में महामंडलेश्वर आपस में विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करते हैं, जबकि समष्टि बैठक में अखाड़ों के पदाधिकारी और महामंडलेश्वर समाज में व्याप्त कुरीतियों, राग-द्वेष खत्म करने, धर्म, राष्ट्र के उत्थान आदि विषयों पर विचार विर्मश करते है।

महानिर्वाणी अखाड़े के स्वामी डॉ. बृजेश शास्त्री बताते हैं कि बैठक के बाद महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और महंतों को राजसी भोज के लिए ले जाया जाता है। यहां पाटला पूजन होता है, जिसमें उनकी देवताओं की तरह पूजा होती है। फिर इन महात्माओं को चांदी के बर्तनों में भोजन परोसा जाता है। इन महात्माओं के साथ समष्टि भोज में बड़ी संख्या में नागा और अन्य साधु-संत भी शामिल होते हैं।

कोतवाल देते हैं निमंत्रण : कुंभ में संत-महात्माओं के एकत्रित होने के बाद अखाड़ों में महामंडलेश्वर आपस में समष्टि भोज की तिथि तय करते हैं। इसके बाद कोतवाल को इसकी सूचना दी जाती है। कोतवाल विभिन्न अखाड़ों में महामंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत एवं अन्य साधु-संतों को समष्टि भोज के लिए निमंत्रण देते हैं। डॉ.शास्त्री का कहना है कि समष्टि भोज के आयोजन में आठ से 10 लाख रुपये तक खर्च होते हैं।

शुरू हो गया है समष्टि भोज : कुंभ मेला में वसंत पंचमी पर्व पर 10 फरवरी को अंतिम शाही स्नान के साथ अखाड़ों की विदाई शुरू हो जाएगी। सो महामंडलेश्वरों की तरफ से समष्टि भोज का आयोजन भी शुरू हो गया है। महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज तथा निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद गिरि समष्टि भोज करा भी चुके हैं। अगले कुछ दिनों में अन्य महामंडलेश्वर भी इसका आयोजन करेंगे।

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