अंकित कुमार, कुंभनगर। रिकॉर्ड विरले ही बनाते हैं। गिनीज, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के पन्ने गवाह हैं। एक से एक अनूठे कारनामे। पढ़ने-पढ़ाने से लेकर लिखने तक, कद से लेकर बड़े काम तक। ठान लिया तो क्या कुछ नहीं कर गुजरा इंसान। वर्ल्ड रिकॉर्ड के पन्ने ऐसे हजारों कारनामों से भरे पड़े हैं। फिर इस मामले में विश्व का सबसे बड़ा आयोजन कुंभ भला पीछे कैसे रह जाए।

दुनिया के सबसे बड़े आयोजन व अस्थाई शहर का तमगा इसके नाम पहले से है। इसी फेहरिस्त में अब एक और रिकॉर्ड कुंभ की शोभा बढ़ाने जा रहा है। एक साथ करोड़ों लोगों के कानों में सुरों का रस घोलने का। जी हां, मेला क्षेत्र में लगाए गए 6700 से ज्यादा लाउडस्पीकर यह कारनामा बखूबी कर रहे हैं। वो भी श्रद्धा भाव से, अनवरत...।

कुंभ को अलौकिक बनाने के लिए सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन, यह सिर्फ सिक्के का एक पहलू है। सरकारी व्यवस्था से इतर संगमनगरी से लगाव की धुन में डूबे लोग भी महाआयोजन में आहुति देने से पीछे नहीं हैं। उन्हीं में एक हैं, प्रवीण आहूजा। उनके दादा ने एक पहल की। यह कि संगम आने वाले भक्तों के कानों में भक्ति संगीत का रस घोला जाए। उनकी ये जिम्मेदारी तीसरी पीढ़ी के प्रवीण पर आई तो उन्होंने दुनिया के अनूठे काम को नई ऊंचाइयां दी।

2007 के अर्द्धकुंभ में उन्होंने श्रद्धालुओं को एक साथ चार हजार लाउडस्पीकर से भक्ति गीत बजाकर सुनाए, जिसके बाद लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स वालों ने इस पहल को सराहा। वहीं, मौजूदा कुंभ में लाउडस्पीकरों की यह संख्या बढ़कर साढ़े छह हजार से ज्यादा हो गई। यानी तय मानिए, कुंभ के खाते में एक और विश्व रिकॉर्ड आने को तैयार है। वो भी खुद के हाथों ही तोड़कर। इस विधा में दूसरा दूर-दूर तक नहीं है।

टेक्नोलाजी ने बनाया आसान

भजनों की शुरुआत सुबह साढ़े पांच बजे से हो जाती है। 3200 एकड़ जमीन पर बसे विशाल कुंभनगर में एक साथ यह संभव कैसे? सवाल जहन में कौंधता है मगर यहां तकनीक ने काम आसान कर दिया। चुनिदा भजनों का सुर रोजाना एक साथ फूटते हैं। आइपी कनेक्शन के जरिये पूरा नेटवर्क तैयार किया गया है। इतना ही नहीं, अगर मेले के एक हिस्से में बोलना हो या कोने-कोने में संदेश पहुंचाना हो। तकनीक यह काम बखूबी कर रही है।

भजन का हर दिन तय

शहनाई से शुरुआत सोमवार को भगवान शंकर के भजन मंगल को हनुमान का गुणगान बुधवार को गणेश का बखान शुक्रवार को भगवान विष्णु को याद शुक्रवार को मां दुर्गा का नमन शनिवार को फिर हनुमान का गुणगान रविवार को सूर्य उपासना के भजन, गीता उपदेश।

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