इंदौर। धार रोड स्थित रामकृष्ण बाग में 11 अक्टूबर से गोपी गीत आराधना महोत्सव शुरू होगा। महोत्सव के लिए एक्स सिक्युरिटी प्राप्त भगवान श्री राधासर्वेश्वर की मूर्ति भी पहुंचेगी। श्री वैष्णव चतुःसंप्रदाय के सबसे प्राचीन पीठ के पीठाधीश्वर श्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज 10 अक्टूबर को इंदौर आएंगे। वे 55 सौ वर्ष पुरानी पीठ के 49वें पीठाधीश्वर हैं। इंदौर संप्रदाय प्रमुख गोविंद राठी ने बताया कि संप्रदाय की परंपरा 24 अवतारों में हंसा अवतार से प्रारंभ होती है। श्री श्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज नागपुर से दोपहर तीन बजे इंदौर आएंगे। भगवान श्री राधा सर्वेश्वर की मूर्ति भी यहां आएगी। यह मूर्ति दाल के दाने के बराबर है। ऐसा माना जाता है कि सर्वेश्वर भगवान की यह मूर्ति नारद ऋषि द्वारा प्रदान की गई है जिसके दर्शन करने मात्र से भगवान की कृपा एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। मूर्ति के दर्शन 11 अक्टूबर सुबह आठ बजे से बजरंग नगर पानी की टंकी के पीछे किए जा सकते हैं। यहदर्शन 13 अक्टूबर तक सुबह आठ बजे से होंगे।

शरद पूर्णिमा पर बांटेंगे खीर

गोपी गीत आराधना उत्सव संप्रदाय के माधव मालू ने बताया कि 11 अक्टूबर से भव्य एवं दिव्य गोपी गीत उत्सव मनाया जाएगा। 13 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव में श्री पावन सिद्ध धाम वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग से नागोरिया पीठाधीपति स्वामी विष्णु प्रपन्नााचार्य महाराज का सान्निध्य भी प्राप्त होगा। उत्सव रोजाना शाम सात से रात 10 बजे तक कृष्ण एवं गोपियोंके बीच विरह प्रेम भक्ति को चरितार्थ करेगा गोपी गीत उत्सव वास्तव में गोपियों द्वारा कृष्ण के प्रेम में गाए गए 17 दोहों का विवरण है। 13 अक्टूबर को भक्त भगवान संग महारास खेलेंगे। शरद पूर्णिमा पर रात्रि को खीर प्रसाद के साथ दमा की औषधि भी दी जाएगी।


रजत के रथ में प्रभु वेंकटेश ने किया भ्रमण

श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में मंगलवार को वेंकटेश जयंती मनाई गई। प्रभु वेंकटेश को चांदी के रथ पर भ्रमण कराया गया। सुबह आठ बजे श्री वेंकटरमना गोविंदा श्री निवासा गोविंदा नाम जप परिक्रमा देवस्थान में निकाली गई। इसके बाद पंचामृत महाभिषेक, इत्र व सभी सुगंधित द्रव्य पदार्थों व फलों के रस कीसहस्त्रधारा कराई गई। साथ ही प्रभु को हल्दी का लेप लगाया गया। प्रभु का दिव्य श्रृंगार कर महाआरती की गई। 1008 नामों से स्वर्ण पुष्पों से अर्चना की गई। रात साढ़े आठ बजे प्रभु वेंकटेश को चांदी के रथ पर विराजित कर देवस्थान में परिक्रमा करवाई गई। वेणुगोपाल संस्कृत पाठशाला के विद्यार्थियों ने वेंकटेश स्तोत्र, अल्वंदर स्तोत्र, श्री सूक्त पुरुष सूक्त का वाचन किया। तीन परिक्रमा करवाने के बाद प्रभु की नजर उतारी व आरती भी

की गई।

Posted By: Yogendra Sharma

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