रामानुजगंज। नगर से 20 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम रजबंधा से लगे रामचौरा पहाड़ कई दशक पूर्व से लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। 15 अगस्त के दिन हजारों श्रद्धालु पथरीला व पगडंडीनुमा यहां पहुंचे और 50 फीट ऊंचा ध्वज फहराया। यहां लोगों ने पूजा-अर्चना भी की। प्रशासन ने भी अच्छी व्यवस्था की थी।

रामानुजगंज-अंबिकापुर मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत तातापानी से चार किलोमीटर अंदर की ओर ग्राम रजबंधा स्थित है। इसी गांव से लगे पांच सौ फीट ऊंचा रामचौरा पहाड़ है जहां राम, सीता, लक्ष्मण के आगमन की भी बात कही जाती है। रामचौरा समिति के अध्यक्ष आशीष रजक, पूर्व सरपंच अनिल केरकेट्टा, तेजराम, वसुदेव, रंजीत रजक, अमरदेव रजक, महेंद्र कुमार रजक, राजेश रजक, ओम प्रकाश रजक, अनूप कुमार गुप्ता, विजय तिवारी, श्यामलाल केसरी, अशोक केसरी, संजय अग्रवाल, ग्राम भंवरमाल के विकास गुप्ता ने राम चौराहा पहाड़ के संबंध में बताया कि हमारे पूर्वजों का मानना है कि देश की आजादी के पहले से लोग रामचौरा पहाड़ के ऊपर जाकर पूजा अर्चना करते रहे हैं।

पहाड़ी के ऊपर एक कुंड और बड़ा पत्थर है और एक राम की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना किया जाता है। 15 अगस्त को विशेष पूजा के संबंध में बताया कि जब हम लोग रामचौरा पहाड़ के ऊपर जाते हैं तो वहां कई संख्या में भालू भी मिल जाते हैं परंतु वहां जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह का आक्रमण नहीं करता है।

पहाड़ के ऊपर लोगों को चढ़ना आसान नहीं होता है क्योंकि यह पहाड़ सीधा ऊंचा है। पूजा के लिए ऊपर जाने हेतु रामचौरा सेवा समिति राजबंधा के द्वारा अस्थाई रूप से लकड़ी की बल्ली से सीढ़ी बनाया गया ताकि श्रद्धालु आसानी से पहाड़ के ऊपर जा सके। रामचौरा पहाड़ पर लोगों के द्वारा दिन भर अखंड हरि कीर्तन आयोजित हुआ। 17 वर्ष पूर्व रामचौरा पहाड़ नक्सलियों का पनाहगाह बना हुआ था। जहां दिन के समय भी नक्सलियों के आने जाने की आहट मिलती रहती थी।

तत्कालीन कलेक्टर ने ली थी सुध

बलरामपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर अवनीश कुमार शरण और इनके पिता ने रामचौरा पहाड़ की विशेषता को सुनकर यहां आवागमन की व्यवस्था की थी एवं पूजा-अर्चना में भी शामिल हुए थे। कलेक्टर अवनीश शरण के पिता ने पांच मीटर की झंडा 52 फीट की बांस के बल्ली में लगाया है जो अभी भी लहरा रहा है।

अभी तक रास्ता नहीं बना

रामचौरा पहाड़ के ऊपर जाने के लिए रास्ता बनाना जरूरी है। कुछ वर्ष पूर्व वन विभाग के द्वारा पोकलेन मशीन से कुछ दूरी पर रास्ता तो बनाए गए परंतु उसके बाद कार्य बंद हो गया । लोगों का कहना है कि इस रास्ते के निर्माण में दो विशाल पत्थर सामने खड़ा है जब तक इस पत्थर को नही हटाया जाएगा तब तक रास्ता नहीं बन सकता। आखिर थक थक हार कर वन विभाग के लोगों ने वहां पर निर्माण कार्य बंद करवा दिया।

कुंड में हमेशा रहता है पानी

रामचौरा पहाड़ी के ऊपर पूजा स्थल से मात्र 200 मीटर की दूरी पर एक छोटा कुंड स्थित है। जहां भीषण गर्मी में भी हमेशा पानी जमा रहता है। कहा जाता है कि जब राम, सीता, लक्ष्मण वहां पर थे तो इस कुंड में ही वे नहाते थे और उनके कपड़ों को धोबी जाति के लोग धोते थे इसलिए इस कुंड का नाम धोबी कुंड भी पड़ा। यही कारण है कि रामचौरा पहाड़ के नीचे में लगभग ढाई सौ धोबी जाति के परिवार निवासरत हैं। ग्राम रजबंधा और इससे लगे कई ग्रामों में धोबी जाति के लोग देखे जा सकते हैं।

अभी तक निर्माण नहीं

कुछ माह पूर्व रामचौरा पहाड़ का रास्ता बनाने हेतु वन विभाग ने पोकलेन मशीन द्वारा किया था परंतु विशाल पत्थर के स्थित होने के कारण यह पूरा नहीं हो सका। उस वक्त डीएफओ विवेकानंद झा ने कहा कि सबसे पहले रामचौरा पहाड़ का अर्थवर्क करना पड़ेगा। उसके बाद ही कंक्रीट के द्वारा सीढ़ी का निर्माण होगा। हमें राज्य शासन से मात्र 27 लाख रुपये प्राप्त हुए थे जिसके कारण पहाड़ी के आधा तक ही पोकलेन मशीन के सहायता से चलने योग्य रास्ता बनाया गया था। हम लोगों ने लगभग एक करोड़ रुपए के स्टीमेट बनाकर भेजा हैं। रामचौरा पहाड़ी के ऊपर जाने योग्य श्रद्धालुओं के लिए सीढ़ी बनाया जाएगा।

पहुंच मार्ग का होगा निर्माण- कलेक्टर

कलेक्टर संजीव कुमार झा ने कहा कि जिले की टीम जल्द ही वहां पर जाकर मुआयना करेगी एवं समय रहते विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा। यदि ग्रामीणों की आस्था है तो किसी भी हालत में उनके विश्वास पर ठेस नहीं पहुंचेगा। हमारा प्रयत्न रहेगा की वहां का पक्का रास्ता बनाया जाए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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