Solar Eclipse 2019: चंद्रमा की स्थिति से सूर्य ग्रहण का निर्धारण होता है। अलविदा कह रहे साल का अखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर गुरुवार को लग रहा है। ग्रहण के दौरान किए गए जप-तप का अनन्त गुना फल प्राप्त होता है और ग्रहण की समाप्ति पर किए गए दान पुण्य का अक्षय फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में सूर्यग्रहण की तीन अवस्था बतलाई गई हैं। सूर्य ग्रहण चंद्रमा के सूर्य के द्वारा ढक लिए जाने की वजह से होता है। इसलिए चंद्रमा के सूर्य के ढकने की स्थिति से सूर्य ग्रहण के तीन प्रकार बताए गए हैं।

पूर्ण सूर्य ग्रहण

जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी नजदीक रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है तो इस समय पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण में पृथ्वी को चन्द्रमा पूरी तरह से अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है। इसके कारण सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच नहीं पाता है और धरती पर दिन में रात जैसा अहसास होता है। ग्रहण के प्रभाव वाले क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है और कुछ समय तक सूर्य धरती से दिखाई नहीं देता है।

आंशिक सूर्य ग्रहण

जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में इस तरह से आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं दे, तो इस तरह के सूर्य ग्रहण को आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस तरह के सूर्य ग्रहण में चन्द्रमा, सूर्य के कुछ ही भाग को अपनी छाया में लेता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में आता है, जबकि कुछ भाग में ग्रहण का असर नहीं होता है। इसमें धरती से सूर्य का आधा भाग ग्रहण के प्रभाव में दिकाई देता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण

जब चन्द्रमा पृथ्वी से काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है, तो इस तरह से सूर्य ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं। वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा की छाया सूर्य पर इस तरह से गिरती है कि सूर्य का सिर्फ बीच वाला हिस्सा इसकी छाया के प्रभाव में आता है. जिसकी वजह से सूर्य के चारों और का भाग काफी चमकता रहता है और बीच वाला भाग अंधेरे में डूबा हुआ रहता है। सू्र्य का बाहरी क्षेत्र वलय के रूप में चमकता रहता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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