केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किमी की दूरी पर एक जगह है पंपा। यहां से पश्चिम की तरफ जाने पर सह्यद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के घने वनों के बीच एक प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर है। यह मंदिर समुद्रतल से लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

कहते हैं कि मुस्लिम धर्म के तीर्थ स्थल मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ माना जाता है। जहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

कंब रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंध और स्कंदपुराण के असुर कांड में जिस शिशु शास्ता का है, अयप्पन उसी के अवतार माने जाते हैं।

माना जाता है कि शास्ता का जन्म मोहिनी वेषधारी विष्णु और शिव के समागम से हुआ था। उन्हीं अयप्पन का मशहूर मंदिर पूणकवन के नाम से विख्यात 18 पहाडि़यों के बीच स्थित इस धाम में है, जिसे सबरीमाला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर कहा जाता है। कई लोगों का यह भी मत है कि परशुराम ने अयप्पन पूजा के लिए सबरीमला में मूर्ति स्थापित की थी। कुछ लोग इसे रामभक्त शबरी के नाम से जोड़कर भी देखते हैं।

कई कथाओं और प्रसंगो में इस बात का भी जिक्र कि करीब 800 साल पहले दक्षिण में शैव और वैष्णवों के बीच वैमनस्य काफी बढ़ गया था। तब उन मतभेदों को दूर करने के लिए श्री अयप्पन की परिकल्पना की गई। दोनों के समन्वय के लिए इस धर्मतीर्थ को विकसित किया गया। यह मंदिर आज भी समन्वय और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। यहां किसी भी जाति का और किसी भी धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति आ सकता है।

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