कई महिलाएं गर्भपात का फैसला मजबूरी में लेती है, लेकिन कई बार महिलाएं अपनी इच्छा से गर्भपात करा लेती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रहों की चाल भी गर्भपात की एक वजह हो सकती है। कहते हैं कि, जब चंद्रमा क्रूर गर्हों के साथ मिलकर उथल-पुथल मचाता है तो मिसकैरेज जैसी स्थितियां बनती हैं।

-बता दें कि, महिलाओं की कुंडली में जब चंद्रमा अशुभ चल रहा होता है तो उनकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। इस दौरान हिस्टीरिया, डिप्रेशन, शारीरिक कमजोरी, लिकोरियाआदि समस्याएं ग्रहों से होने वाली समस्याओं की देन हैं। जो महिलाएं जाने-अनजाने में गर्भपात जैसा पाप करती हैं, उन्हें ब्रह्म हत्या से दोगुना ज्यादा पाप लगता है। इस महापाप का कोई प्रायश्चित भी नहीं है।

-मनुस्मृति में बताया गया है कि, यदि अन्न पर गर्भपात करने वाले की दृष्टि भी पड़ जाए तो वह अन्न खाने के लायक नहीं रहता। गर्भस्थ शिशु को अनेक जन्मों का ज्ञान होता है, इसलिए श्रीमद् भागवत में उसको ऋषि और ज्ञानी कहा गया है।

-संसार का कोई भी धर्म गर्भपात का समर्थन नहीं करता। ये कार्य मनुष्यता के खिलाफ माना जाता है। महिला के गर्भ में पल रहे जीवमात्र को भी जीने का पूरा अधिकार है। उससे ये अधिकार छीनना महापाप है।

-नारज पुराण के अनुसार, श्रेष्ठ पुरुषों ने ब्रह्म हत्या आदि पापों का प्रायश्चित बताया है। इसके तहत गर्भपात कराने वाली महिलाओं को पाखंडी और परनिंदर का भी उद्धार होता है, लेकिन जो गर्भस्थ शिशु की हत्या करता है उसके उद्धार का कोई उपाय नहीं है।

-किसी सन्यासी और गर्भपात कराने वालों को महापापी कहा जाता है। ऐसा मनुष्य कंभीपाक नरक में गिरता है। फिर हजार जन्म गिद्ध, सौ जन्म सुअर, सात जन्म कौआ और सात जन्म तक सर्प बनता है।