Astro News: पितृ दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक खतरनाक योग है। माना जाता है कि जिस जातक की कुंडली में पितृ दोष होता है। उसका जीवन कष्टों से भरा होता है। बुद्धिमान होते हुए भी उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाती है। आइए जानते हैं जन्म कुंडली में कैसे बनता है यह योग।

राहु-केतु पितृ दोष पैदा करते हैं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में राहु या केतु नवम भाव में स्थिति होते हैं, तो जातक पितृ दोष से पीड़ित माना जाता है। इन लक्षणों के आधार पर भी पितृ दोष की स्थिति को समझा जा सकता है।

- कुंडली में पितृ दोष होने पर घर में विवाद की स्थिति बनी रहती है।

- घर में बड़ों का सम्मान धीरे-धीरे कम होने लगता है।

- विवाद और तनाव बना रहता है।

- घर में आने के बाद मन खराब होने लगता है।

-शादी में मधुरता नहीं आती और नुकसान होता रहता है।

- व्यक्ति कर्जदार और बुरी संगत में पड़ जाता है।

- विवाह में देरी होती है।

- पदोन्नति में बाधा आती है।

पितृ दोष का उपाय

पितृ दोष को दूर करने के लिए पितृ पक्ष की अवधि सबसे उत्तम मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों की पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय पूर्वजों को याद करना चाहिए। जीवन में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। कु्त्ते और कौए को भोजन कराएं। गाय को रोटी और हरा चारा दें। साथ ही अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष पर जनेऊ चढ़ाएं।

डिसक्लेमर

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Posted By: Kushagra Valuskar

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