आज हम बात करते हैं मंगल ग्रह के बारे में जो हमारे जीवन में क्या और किस तरह से प्रभाव डालता है। जिसकी कुंडली में 12 14 78 किसी भी भाव में अगर मंगल होता है तो वह इंसान पूरी तरह से मांगलिक कहा जाता है। कई विद्वान लोग अपनी भाषा में सौम्या मंगल बताया जाता है। कई लोग बोलते हैं कि 28 उम्र के बाद मंगल नष्ट हो जाता है। कई लोग बोलते हैं कि कुंभ विवाह से यानी कि आपका विवाह किसी पेड़ से या घड़े से किया जाता है तब दोष मांगलिक दोष मिट जाता है। लेकिन सच तो यह है कि इंसान मांगलिक है तो मांगलिक है वह मरे तक मांगलिक ही रहेगा ना कि उसका दोष कम होगा। ना उसका सोम में प्रभाव होगा ना वह किसी कुंभ विवाह से मंगल दोष नष्ट नहीं होगा। जो हम जन्म से लेकर हैं जो ग्रह जिस भाव में बैठा है फल भी उसको मरे तक वैसा ही उस स्थिति में देगा।

भाव में मंगल किसी का होता है तो एक तो सातवां मंगल जिसका होता है वह भाव जो है जीवनसाथी का भाव है। पार्टनरशिप का भाव है साझेदारी का भाव है। ऐसे व्यक्ति ने किसी के साथ साझेदारी नहीं करनी चाहिए अगर ऐसा व्यक्ति किसी के साथ या जो व्यक्ति मांगलिक नहीं है उसके साथ शादी करता है यह शादी कभी टिकेगी नहीं। शादी हो भी गई तो इनके ऊपर इन दोनों के बीच में झगड़े का स्वरूप प्राप्त हो जाएगा और मामला कोर्ट तक पहुंच जाएगा।

सप्तम भाव का मंगल देता है यह प्रभाव

सप्तम भाव का मंगल है उसका यह एक कारण है कि ऐसे व्यक्ति को एक बार कोई भी चीज जीवन में मिलती है कोई भी चीज मैंने कहा है या कोई भी व्यक्ति या कोई भी प्रॉपर्टी या कोई भी वाहन एक बार अगर मिलती है अगर उस व्यक्ति ने वह चीज वह व्यक्ति नहीं संभाली और उसके हाथ से चली गई तो दोबारा कभी भी वह लौट के नहीं आएगी। वह चीज तुम को दोबारा नहीं मिलेगी इतना आप ध्यान रखो या प्रथम भाव की दृष्टि सप्तम पर जाती है। चतुर्थ की दृष्टि भी सप्तम पर जाती है या बारहवें भाव की भी दृष्टि सप्तम पर जाती है इन सभी को व्यक्ति को यह नियम लागू पड़ता है।

मांगलिक होने के पीछे यह है कारण

अब मांगलिक जो है यह क्यों बनता है मित्रों यह इसका कारण जो है हमारे पिछले जन्म से होता है ऐसे व्यक्ति ने अपने जीवनसाथी को या व्यवसाय में कारोबारी साझेदार को नुकसान पहुंचाया होता है या उसको कष्ट दिए होते हैं पिछले जन्म में इस जन्म में उसका भुगतान करने के लिए इस प्रकार का मंगल आपके कुंडली में योग बना देता है और आपको उसका फल भुगतना पड़ता है। अब इसका एक उपाय क्या है इसका उपाय मेरे दृष्टि से एक ही है कि ऐसे व्यक्ति की शादी या उसके संबंध सिर्फ मांगलिक व्यक्ति से ही होने चाहिए तभी वह मंगल की तीव्रता कम होती है अन्यथा जैसा का वैसा ही रहेगा।

मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही होना चाहिए

हमारे पूर्वजों ने कहा है कि मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही होना चाहिए और यह हमेशा सच ही रहेगा इसमें कोई बदलाव नहीं रहेगा। लेकिन हम आज के जमाने में कोई चीज कुंडली या इसका महत्व नहीं देखते हैं बस लड़का या लड़की पसंद आई मांगलिक हो या नाम मांगलिक हो हम शादी करते हैं लेकिन कुछ ही साल में यह विभक्त हो जाते हैं इनके अंदर मनमुटाव रहता है तो ऐसे व्यक्ति ने मांगलिक व्यक्ति से ही शादी करनी चाहिए तभी उसको फल मिलेगा।

मंगल बिगड़ने के ये होते हैं परिणाम

प्रथम भाव जो है वह अग्नि का कारक है मेष राशि है जिसमें मंगलौर विराजमान होता है तो वह राशि ऊर्जावान राशि है और यह मंगल बहुत ही क्रोधित होता है। इसका परिणाम ज्यादा भुगतना पड़ता है या सप्तम भाव का मंगल होता है तभी इनको सावधानी से चलना पड़ता है। इनकी जीवन में मुश्किलें रुकावटें झगड़े बार-बार होते रहते हैं तो सभी लोग शादी से पहले मांगलिक का विचार या कुंडली मिलन का विचार अवश्य करें। जिन का विवाह हुआ है उनको मंगल का फल अच्छी तरह से नहीं मिल रहा है वह भी अच्छी तरह से उपाय करें और अपने जीवन को शांति में गुजारें।

(यह आलेख हस्‍तरेखातज्ञ पंडित विनोद जी द्वारा लिखा गया है)

Posted By: Navodit Saktawat