Ganesh Chaturthi 2021: हिंदुओं में गणेश उत्सव का बड़ा महत्व है। हर साल लोग इसका इंतजार करते हैं। ये पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है। वह अनंत चतुर्दशी तक चलता है। भक्त भगवान गणपति की प्रतिमा को घर लाते हैं। वह उनकी स्थापना तक पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल गणेश उत्सव 10 सितंबर से शुरू होगा और 19 सितंबर तक चलेगा। भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र लंबोदर को मोदक बहुत प्रिय है। ऐसे में भक्त गणेश को मोदक का भोग लगाते हैं। आइए जानते हैं गणपति को मोदक इतने प्रिय क्यो हैं।

पहली कथा

मान्यताओं के अनुसार एक बार भगवान शिवजी आराम कर रहे थे। वह द्वार पर गणेश पहरा दे रहे थे। परशुराम वहां शंकर से मिलने पहुंचे लेकिन गणपति ने उन्हें रोक दिया। इस पर परशुराम नाराज हो गए। तब दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया। तब परशुरामजी ने शिवजी के परशु से गणपति पर हमला कर दिया। इससे उनका एक दांत टूट गया। दांत टूटने के कारण गणेशजी को खाने-पीने में परेशानी होने लगी। तब उनके लिए मोदक बनाए गए। तब से मोदक गणपति के प्रिय बन गया।

दूसरी कथा

दूसरी कथा गणपति और माता अनुसुइया से जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार भगवान शिव अपने परिवार के साथ अनुसुइया के घर गए थे। तब माता अनुसुइया ने सबसे पहले छोटे सदस्य भगवान गणेश को भोजन करा हूं। इसके बाद भोलेनाथ और माता पार्वती को परोस दूंगी। अनुसुइया ने गणपति को भोजना दिया, लेकिन उनकी भूख नहीं मिटी। तब अनुसुइया ने एक मिठाई का टुकड़ा गणेश जी को दिया। जिससे खाते ही उनका पेट भर गया। तब भगवान शिव ने 21 बार डकार ली और कहा कि उनका पेट भर गया। देवी पार्वती ने अनुसुइया से मिठाई का नाम पूछा। तब उन्होंने इसका नाम मोदक बताया। तब से लंबोदर का मोदर प्रिय माना जाने लगा है।

Posted By: Navodit Saktawat