बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। गुप्त नवरात्र पंचमी का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इसी दिन सरस्वती जयंती भी है। दुर्गासप्तशती का पाठ व सहस्त्रनाम का पाठ कर पुष्प अर्पण करने वाले भक्तों को विशेष लाभ मिलेगा। देवी प्रसन्न् होंगी।

गुप्त नवरात्र की बुधवार को चतुर्थी तिथि है। 26 जनवरी को पंचमी होगी। सनातन धर्म में चार नवरात्र होते हैं। माघ और आषाढ़ में पड़ने वाले नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इसके अलावा चैत्र और शारदीय नवरात्र मनाया जाता है। इसमें भी नौ दिनों तक आदिशक्ति के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। इसमें तांत्रिक व सात्विक दोनों प्रकार की पूजा-आराधना होती है।

30 जनवरी को नवमीं

माता श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, श्रृंगार, देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक, महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, राजराजेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी देवी का श्री सूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियापूर्वक अभिषेक, बगलामुखी मंत्र जाप ब्राह्मणों के द्वारा निरंतर जारी है। प्रतिदिन रुद्राभिषेक भी किया जा रहा है। पंचमी पर सरस्वती जयंती एवं सहस्त्रनाम से पुष्प अर्पण सहित विभिन्न् कार्यक्रम होंगे। 30 जनवरी को नवमीं पर हवन, यज्ञ, कन्यापूजन एवं भंडारा होगा। 31 जनवरी को गुप्त नवरात्र समापन होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित वासुदेव शर्मा का कहना है कि पंचमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तों को दुर्गासप्तशती पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य लाभ मिलता है।

Posted By: Manoj Kumar Tiwari

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