राजस्थान का कोटा शहर वैसे तो शिक्षण संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है। कोटा-डोरिया यह वही स्थान है, जहां रावण के भाई विभीषण का मंदिर है।

कोटा-डोरिया में यह मंदिर चौथी शताब्दी में बनाया गया। यहां हर वर्ष मार्च के माह में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यह मंदिर प्राचीन काल में कैसे बना इस बार में कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। जैसे कि...

अयोध्या में श्रीराम का राज्याभिषेक हो रहा था, उधर विभीषण हनुमान जी और शिव की मूर्तियों को कांवड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा पर निकले। विभीषण ने यह संकल्प लिया था कि कांवड़ जमीन से स्पर्श नहीं होगी।

यदि होती है तो उनकी तीर्थयात्रा वहीं समाप्त हो जाएगी। और वहीं हनुमानजी और शिव की मूर्तियों को स्थापित कर देंगे।

हुआ यूं कि विभीषण जब कोटा-डोरिया के नजदीक कैथून से निकले तो एक हिस्सा कोटा के रंगबाड़ी बालाजी में और दूसरा सिरा चारचौमा में स्पर्श हुआ। इस तरह यहां मंदिर बनाए गए।

कहते हैं मंदिरों की पूजा तो उसी समय से पूरी होती गई लेकिन चौथीं शताब्दी में विभीषण के मंदिर को बनाया गया था।