हमारी संस्कृति हमें बड़ों का सम्मान करना सीखाती हैं। कई तरह के संस्कारों में से एक संस्कार बड़ों को प्रणाम करना और उनके पैर छुना भी माना जाता है। जब भी हमें कोई बड़ा व्यक्ति नजर आता है हम उनसे प्रणाम कर उनके पैर छू लेते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, कुछ स्थितियां ऐसी भी हैं जिनमें हमें बड़ों को प्रणाम और चरण स्पर्श करने से बचना चाहिए।

-शास्त्रों के अनुसार श्मशान से लौटते हुए व्यक्ति को कभी प्रणाम नहीं करना चाहिए। मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से श्मशान से लौटते वक्त व्यक्ति की मनोदशा सामान्य से अलग होती है। ऐसे समय में वह व्यक्ति अस्थिर होता है। काफी हद तक उसका सांसारिक मोह उस समय भंग हो चुका है। ऐसे में वह खुश होकर आशीर्वाद नहीं दे पाता है।

-जब कोई व्यक्ति ध्यान कर रहा हो तो उसे प्रणाम ना करें। पूजा में मग्न व्यक्ति को प्रणाम ना करें, ना ही उनसे कोई बात करें। ऐसा करने से उसकी भक्ति में विघ्न पड़ता है।

-हिंदू धर्म में अपने बड़ों के चरण स्पर्श का विधान है। लेकिन, इस बात का विशेष ध्यान रखे कि, किसी भी सोते हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श ना करें। शास्त्रों के अनुसार लेटे हुए व्यक्ति के पैर केवल एक ही स्थिति में स्पर्श किए जा सकते हैं, जब उसकी मृत्यु हो चुकी हो।

-प्रणाम हमेशा दोनों हाथ जोड़कर करना चाहिए। क्योंकि जब हम दोनों हाथों को जोड़ते हैं तो हमारी हथेलियों में बने एक्यूप्रेशर प्वाइंट में रगड़ होती है और इसके दबाव से हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।