उज्जैन / इंदौर। प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर है। स्थिति यह है कि राज्य के कई क्षेत्रों में नदी-नाले उफान पर आ गए। भारी बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। भोपाल, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, देवास, मंदसौर, शाजापुर समेत कई क्षेत्रों में लोगों के मकानों में बारिश का पानी भर गया है। ऐसे में लोग अतिवृष्टि से परेशान हो चुके हैं।

प्रदेश में हुई तेज बारिश को लेकर ज्योतिष के विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष अनंत नामक कालसर्प योग के साथ ऐसे योग बन रहे हैं जो कि अतिवृष्टि के कारक हैं। दूसरी ओर नक्षत्र भी तेज बारिश का प्रभाव बना रहे हैं। ज्योतिषों की मानें तो लोगों को फिलहाल बारिश से राहत नहीं मिल सकेगी।

बारिश के साथ ही लोग मौसम जनित रोगों से भी ग्रस्त रहेंगे। बारिश का यह दौर दीपावली तक जारी रहने की संभावना है। हालांकि इस अवधि तक तेज बारिश से लोगों को राहत मिल जाएगी, लेकिन दिवाली पर्व के पहले तक धीमी और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।

यदि वर्षा की स्थिति के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि पहले इस वर्ष पंच ग्रही योग बने इसके बाद सूर्य, शुक्र, मंगल और बुध का चर्तुग्रही योग बन रहा है। ये चारों ग्रह सिंह राशि में होने के कारण वर्षा अधिक हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शनि और केतु की युति बनने से वर्षा का प्रभाव अधिक हो गया है। ये दोनों ग्रह धनु राशि में होने के कारण उथल-पुथल मचा रहे हैं।

10 सितंबर को तो तेज बारिश होगी ही इसके बाद 11 सितंबर को भी तेज बारिश की संभावना है। इसके साथ 13 सितंबर को देश के कई क्षेत्रों में बरसात होगी।

जानकारों का कहना है कि इन अवधियों में खंड वर्षा के भी योग हैं। 10 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र होगा इसकी समाप्ति के बाद श्रावण नक्षत्र शुरू होगा।

इस नक्षत्र के स्वामी चंद्र हैं, जिसके कारण अति वृष्टि की संभावना है। इसके बाद शुरू होने वाले धनिष्ठा नक्षत्र पर इसके स्वामी मंगल का प्रभाव होगा। इस काल में लोग रोग ग्रस्त हो सकते हैं। 13 सितंबर को शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा जिसके स्वामी राहु हैं। बताया जा रहा है कि इस काल में देशभर के कई क्षेत्रों में ज्यादा या कम बारिश होगी।

कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 15 सितंबर के बाद लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जबकि कुछ का मत है कि बारिश का दौर दीपावली तक जारी रहेगा लेकिन इस अवधि में बारिश धीमी हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।

इस वर्ष वर्षा को लेकर, अनंत कालसर्प योग बना है। जिसके कारण अधिक बारिश हो रही है। तीव्र गति से और अधिक वर्षा होने का कारण मंगल, बुध,सूर्यऔर शुक्र ग्रहों कासिंह राशि में एक साथ आकर चर्तुग्रही योग बना है। पूर्ण रूप से लोगों को वर्षा से राहत दीपावली के बाद ही मिलेगी। वर्तमान में शनि, केतु की युति बन रही है जो कि वर्षा कारक योग बना रहे हैं। ये दोनों ग्रह धनु राशि में हैं। - पं. भगवती प्रसाद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, उज्जैन।

10 सितंबर से उत्तराषाढ़ नक्षत्र प्रारंभ हो रहा है। इस नक्षत्र के प्रभाव से तीव्र और अतिवृष्टि होगी। 11 सितंबर को श्रावण नक्षत्र होगा इसे श्रवण नक्षत्र भी कहा जाता है। इसके स्वामी चंद्र हैं। इस नक्षत्र के प्रभाव से वर्षा योग बन रहे हैं। धनिष्ठा नक्षत्र में लोगों के रोग ग्रस्त होने की संभावना है जो कि 12 सितंबर तक अपना प्रभाव दिखाएगा।इस वर्ष मंगल, बुध, शुक्र की युति बन रही है और सूर्य दशमेश होकर पराक्रम भाव में है। यह योग वर्षा कारक है। जिससे कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है।

- अर्चना सरमंडल, ज्योतिषाचार्य व मां बगलामुखी साधिका, उज्जैन।