मंदसौर(मध्यप्रदेश)। शहर से पांच किमी दूर ग्राम नालछा स्थित नालछा माता मंदिर को लेकर मान्यता है कि मां नालछा दिन में तीन बार रूप बदती है। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और रात्रि में वृद्धावस्था का रूप दिखता है।

प्राचीन मान्यता के अनुसार राजा दशरथ के राज्य अयोध्या की सीमा का यह अंतिम पड़ाव था। पास बहने वाले नाले के किनारे ही राजा दशरथ ने श्रवण कुमार का वध किया था।

तभी से नाले को श्रवण नाले के नाम से ही जाना जाता है। नवरात्रि पर मां का विशेष श्रृंगार आभूषणों से किया जाता है। नौ दिन तक महाआरती और धार्मिक आयोजनों का दौर दिन भर चलता है।

दूधाखेड़ी माता मंदिर : भस्म लगाने से ठीक हो जाती हैं बीमारियां

भानपुरा से 12 किमी दूर दूधाखेड़ी माता मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। नवरात्रि में करीब 12 से 15 हजार लोग रोज दर्शन करने आ रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि पोलिया और लकवे जैसी बीमारी भी मंदिर में हुए हवन की भस्म लगाने से ठीक हो जाती हैं।

दूधाखेड़ी माता

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