Sawan 2019: हमारे देश में 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व होता है। मान्यताओं के अनुसार ये 12 ज्योतिर्लिंग स्वयंभू हैं। यानी इनकी उत्पत्ति खुद से हुई है। इनमें साक्षात शिव का वास माना जाता है। इसलिये हिन्दू धर्म में इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एवं पूजन को अत्यंत फलदायी माना गया है। जो भी भक्त इन सभी स्वरूपों का दर्शन करता है भगवान भोलेनाथ उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।

भगवान शिव के इन 12 स्वरूपों के पूजन की अलग-अलग विधि एवं मान्यताएं हैं। अगर इनका सही से पालन नहीं किया गया, तो पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती और इसका फल भी पूरा नहीं होता। ऐसा कहा जाता है कि भोलेदानी के इन 12 में से 7 स्वरूपों पर कोई आम भक्त या श्रद्धालु पंचामृत से अभिषेक नहीं कर सकता।

ये सात ज्योतिर्लिंग हैं- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग। इन सात ज्योतिर्लिंगों पर पंचामृत अभिषेक सिर्फ वहां के निर्धारित पुजारी ही कर सकते हैं। इसलिये हर श्रद्धालु इन बातों का पूरा ध्यान रखता है कि वो ऐसी कोई भी विधि का अनुपालन न करें।

इससे पूजन की विधि प्रभावित हो और भगवान नाराज हों। इनके अलावा काशी विश्वनाथ, रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पर कोई भी भक्त पंचामृत अभिषेक कर सकता है। इसके अलावा हमारे देश मे वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रमुख श्रद्धा के केंद्र हैं जहां सावन में विशेष भीड़ तो राजति ही है। साथ ही सालों भर यहां देश विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

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