Sawan 2022: हिंदू धर्म में भगवान शिव का पवित्र महीना सावन चल रहा है। ऐसे में हम आपको महादेव और उनके मंदिरों से जुड़ी कहानियों के बारे में बता रहे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देंगे। जिसे चोल वंश के राजा ने बनवाया थ। यह तमिलनाडु के तंजौर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर है। इस मंदिर को स्थानीय रूप से राजराजेश्वरम और थंजाई पेरिया कोविल के नाम से जानते हैं। यह मंदिर विश्व धरोहर के रूप में जाना जाता है। बृहदेश्वर मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है। जिसका पता वैज्ञानिक आज तक नहीं लगा पाए हैं।

ग्रेनाइट से बना है मंदिर

बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल शासक महाराजा राजराज प्रथम के शासनकाल में 1003-1010 ई. में निर्मित किया गया। राजाराज प्रथम भोलेनाथ के परम भक्त थे। जिस कारण उन्होंने कई शिव मंदिरों का निर्माण करवाया था। बृहदेश्वर मंदिर ग्रेनाइट से निर्मित है। यह अपनी भव्यता, वास्तुशिल्प और गुंबद की वजह से मशहूर है।

बगैर नींव के खड़ा मंदिर

भगवान शिवजी को समर्पित मंदिर 13 मंजिला है। जिसकी ऊंचाई करीब 66 मीटर है। यह विशालकाय मंदिर बगैर नींव के हजारों साल से खड़ा है। यह एक रहस्य है कि बिना नींव के इतने साल से कैसे टिका हुआ है।

80 टन का स्वर्णकलश

बृहदेश्वर मंदिर की एक और विशेषता है कि इसके शिखर पर स्वर्णकलश है। ये स्वर्णकलश जिस पत्थर पर स्थित है। उसका वजन 80 टन है। अब इतने वजनदार पत्थर को मंदिर के शिखर पर कैसे ले जाया गया होगा। यह एक रहस्य बना हुआ है। कहा जाता है कि इस गुंबद की परछाई धरती पर नहीं पड़ती।

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Posted By: Arvind Dubey

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