शनिदेव 29 अप्रैल को 30 साल बाद मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। वे हर ढाई साल में राशि बदलते है। इस राशि में आने में उन्हें तीस वर्ष लगे। यह राशि परिवर्तन मिथुन व तुला के लिए खुशियां लेकर आएगा। जिन पर चल रही शनि की ढैया समाप्त होगी। इसके बाद धनु में चल रही साढ़े साती भी खत्म होने से इस राशिवालों को समस्याओं से निजात मिलेना लगेगा। अन्य राशि के जातकों को मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार न्याय व्यवस्था और ताकतवर होगी। राजनीतिक उतार-चढ़ाव और आरोप-प्रत्यारोप में कमी नहीं होगी। किसानों को लाभ होगा। व्यापारी भी मुनाफे की ओर बढ़ेंगे। कर्मफल दाता शनि के इस राशि में रहने से इसकी तीसरी दृष्टि राहू पर पड़ने के कारण संक्रमण फैलाने वाले रोग पनप सकता है। हालांकि जुलाई तक ही यह स्थिति रहेगी।

इन राशियों पर शुरू होगी ढैया

ज्योतिषाचार्य के अनुसार कर्क और वृश्चिक राशि पर शनि की ढैया शुरू होगी। साढ़े साती का कुंभ का दूसरा, मकर पर तीसरा और मीन पर पहला चरण शुरू होगा। 12 जुलाई से शनि वक्री अवस्था में मकर राशि में प्रवेश करेंगे। तब मिथुन और तुला फिर ढैया के प्रभाव में आ जाएंगे। शनि जब दोबारा कुंभ में जाएंगे तो धनु से साढ़े साती और मिथुन व तुला ढैया से मुक्त हो जाएगी। मेष, तुला, धनु राशिवालों के इस अवधि में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। जबकि मकर, कुंभ और वृश्चिक राशि पर आलस्य हावी रहेगा।

क्या बनेगा संयोग?

29 अप्रैल को शनिदेव का कुंभ राशि में प्रवेश होगा। 30 को शनिश्चरी अमावस्या रहेगी। वैशाख में हो रही इस अमावस्या को सतुवाई अमावस्या कहते हैं। अमावस्या तिथि के स्वामी शनिदेव हैं। इस दिन शनि के साथ पीपल की पूजा व दान-पूण्य करना फलदायी रहता है।

अशुभ प्रभाव से कैसे बचें और मान्यता

शनि न्याय के देवता माने जाते हैं। नवग्रहों में शनिदेव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। वे लोगों को उनके द्वारा किए गए कर्मों के अनुसार फल देते हैं। वहीं कर्मफलदाता के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप, हनुमान चालिसा का पाठ संकटों से मुक्ति दिलाएगी। जरूरतमंदों को भोजन और दान करने से बाधाएं दूर होंगी।

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Posted By: Arvind Dubey