Shani Dhaiya 2022: शनि ग्रह 12 जुलाई को राशि परिवर्तन करेंगे। वे वक्री चाल चलते हुए कुंभ राशि से निकलकर मकर राशि में आएंगे। वक्री शनि का गोचर सभी राशियों को प्रभावित करेगा। साथ ही शनि राशि परिवर्तन का असर उन राशि वालों पर पड़ेगा। जिन पर साढ़े साती या ढैय्या चल रही है।

खत्म होगी 2 राशियों की ढैय्या

शनि देव फिलहाल कुंभ राशि में हैं। इस कारण कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर ढैय्या चल रही है। इन राशियों पर 29 अप्रैल से ढैय्या शुरू हुई। वहीं मिथुन और तुला राशि से शनि की ढैय्या खत्म हुई थी। हालांकि अब फिर वक्री शनि के मकर राशि में आते ही दोनों राशियों पर ढैय्या शुरू हो जाएगी। साथ ही कर्क और वृश्चिक राशिवालों को राहत मिलेगी।

कर्क-वृश्चिक वालों को मिलेगी सफलता

12 जुलाई को शनिदेव के मकर राशि में प्रवेश करते ही कर्क और वृश्चिक राशि से ढैय्या समाप्त हो जाएगी। साथ ही इन्हें कामों में सफलता मिलने लगेगी। अटके हुए काम बनेंगे। रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा। तनाव और शारीरिक कष्ट कम होंगे। प्रमोशन, इंक्रीमेंट और व्यापार में वृद्धि होगी। अगर कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है, तो काफी लाभ देंगे। इस दौरान शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय जरूर करें।

शनि शांति मंत्र स्तुति

राज्य नष्ट हुए राजा नल को शनिदेव ने स्वप्न में अपने एक प्रार्थना मंत्र का उपदेश दिया था। उसी नाम स्तुति से उन्हें पुनः राज्य उपलब्ध हुआ था। उस स्तुति से शनि की प्रार्थना करनी चाहिए। जो जातक हर शनिवार को इसका पाठ करता है। उसे कभी शनि की पीड़ा नहीं भोगनी पड़ती। स्तुति इस प्रकार है-

क्रोडं नीलांजनप्रख्यं नीलवर्णसमस्नजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं नमस्यामि शनैश्चरम्।।

नमोर्कपुत्राय शनैश्चराय नीहारवणाजनमेचकाय। श्रुत्वा रहस्यं भवकामदश्च फलप्रदो में भव सूर्यपुत्र।।

मनोस्तु प्रेतराजाय कृष्णदेहाय वै नमः। शनैश्चराय क्रूराय शुद्धबुद्धिप्रदायिने।।

य एभिर्नामभिः स्तौति तस्य तुष्टा भवाम्यहम्। मदीयं तु भयं तस्य स्वपेपि न भविष्यति।।

शनि देव के विशेष मंत्र

1. ऊँ शन्नो देवीरभिष्टयआपो भवन्तु पीतये शंयोर भिस्त्रवन्तु नः।

2. ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

3. ऊँ शं शनैश्चराय नमः।

4. ऊँ ऐं ह्रीं स्त्रहं शनैश्चराय नमः।

5. ऊँ शं शनैश्वराय नमः।

6. ऊँ स्वः भुवः भूः ऊँ सः खौं खीं खां ऊँ शनैश्चराय नमः।

7. नीलांजनं समाभासं रविपुत्र यमाग्रजम। छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

8. ऊँ शनैश्चराय सशक्तिकाय सूर्योत्मजाय नमः।

9. ऊँ शान्ताय नमः

10. ऊँ शरण्याम नमः

11. ऊँ वरेण्याय नमः

12. ऊँ सर्वेशाय नमः

13. ऊँ सौम्याय नमः

14. ऊँ सुरवन्द्याय नमः

15. ऊँ सुरलोकविहारिणे नमः

16. ऊँ सुखासनोपविष्टाय नमः

17. ऊँ सुन्दराय नमः

18. ऊँ घनाय नमः

19. ऊँ घनरूपाय नमः

20. ऊँ घनाभरणधारिणे नमः

शनि देव की कृपा प्राप्ति के उपाय

  1. निर्दोष रत्न-नीलम/जामुनिया/कटेला सवा पांच रत्ती का धारण करना चाहिए। उसे पंचधातु में जड़वाकर शनिवार के दिन किसी ब्राह्मण को घर बुलाकर उसकी शोडषोपचार पूजा व प्राण प्रतिष्ठा करवाकर धारण करना चाहिए। अगर जातक प्राण प्रतिष्ठा करवाने की स्थिति में नहीं हैं तो रत्न को रात्रि में गाय के कच्चे दूध में रखकर प्रातःकाल गंगा जल में पवित्र करके धारण किया जा सकता है।
  2. पीपल के वृक्ष के नीचे सायंकाल में दीपक जलाकर सात परिक्रमा करें। सात लड्डू कुत्ते को खिलाएं। इससे शनि अनुकूल फल प्रदान करते हैं।
  3. किसी भी शनिवार को जब पुष्य नक्षत्र हो तो बिछुवा बूटी की जड़ व शमी की जड़ को काले धागे में बांधकर दाहिनी भुजा में धारण करने से शनि का दुष्प्रभाव कम होने लगता है।
  4. काले रंग के घोड़े की नाल खोजकर लाएं। शनिवार के दिन लुहार से मध्यमा उंगली के नाप के बराबर अंगूठी बनवाकर घर ले आएं। उसे स्वच्छ जल में धोकर रातभर कच्चे दूध में डुबोकर प्रातःकाल में श्रद्धा से दाहिनें हाथ की मध्यमा उंगली में धारण करें।
  5. शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में तेल भरकर उसमें 7 दाने काले चने डाल दें। 7 दाने जौ के, 7 जाने काली उड़द के और उसमें सवा रुपया रखकर उसमें अपना मुंह देखकर दान करें या शनि मंदिर में रख दें।
  6. भैंसा या घोड़े को शनिवार के दिन काला देसी चना खिलाने से शनि ग्रह अनुकूल होता है।
  7. शुक्रवार की रात सवा-सवा किलो देसी चना तीन जगह भिगोयें। शनिवार की सुबह उन्हें सरसों के तेल में छौंककर श्रद्धा से शनिदेव को भोग लगातर पहला सवा किलो चना घोड़े या भैंसे को खिला दें। दूसरा सवा किलो चना कुष्ठ रोगियों को बांट दें। वह तीसरा सवा किलो चना अपने ऊपर से उतारकर किसी सुनसान स्थान में जहां चार साते जाते हों, उसके बीच में रखकर आ जाएं।
  8. अगर आप कोर्ट कचेहरी से परेशान हों तो श्री शनिदेव की आराधना, साधना और शनि अभिषेक अवश्य करें।

डिसक्लेमर

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Posted By: Navodit Saktawat

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