अमूमन सफल लोग कम पढ़े-लिखे रहे हैं (बिल गेट्स और स्टीव जॉब्स, दोनों ने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी) और जो विद्वान रहे उनके दिन गरीबी में बीते।

यह एक सच्चाई है। इसके अलावा गौर करने वाली बात यह भी है कि अच्छे समय में लक्ष्मी हमारी ओर आती है और सरस्वती हमसे दूर जाती है, लेकिन बुरे वक्त में सरस्वती हमारी ओर आती है और लक्ष्मी हमसे रूठ जाती है।

सरस्वती सिर्फ विद्या और ज्ञान की देवी ही नहीं बल्कि वह कल्पना की आराध्य देवी हैं, और यह मनुष्य की कल्पना ही है जो भविष्य की समस्याओं को सुलझाने की दृष्टि देती है और उसी से नए विचारों पर काम करने की प्रेरणा बनती है।

आमतौर पर देवी सरस्वती का अर्थ उस ज्ञान से ही लगाते हैं जो हमें स्कूल में मिलता है, लेकिन जब तक ब्रिटिश भारत नहीं आए थे, भारत में आधुनिक स्कूल नहीं थे।

हमारे पास आश्रम थे और ज्ञान परंपरागत रूप से पीढ़ियों में हस्तांतरित होता था। कुम्हार स्वयं अपने बेटे को मिट्टी के बर्तन बनाना सिखाता था, मां अपनी बेटियों को खाना बनाना सिखाती थी।

जितना मनोयोग से सीखते थे उतना जीवन सुंदर बनता था। इसलिए सरस्वती के कई रूप हैं, 'वह ज्ञान जो हमें स्कूल और अभ्यास से मिलता है वह समाज में सबसे प्रमुखता से सरस्वती का प्रतीक है।'

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दोनों ही तरह के समय में हमें सरस्वती की तरफ ध्यान देना चाहिए। अच्छे समय में सरस्वती हमें सिखाती है कि हम विस्तार को कैसे बनाए रख सकते हैं। बुरे समय में सरस्वती की कृपा से ही हम बुरे भाग्य को अच्छे भाग्य में बदलने की राह पा सकते हैं।