Surya Grahan 2019: सूर्य ग्रहण गुरुवार सुबह 2 घंटे 40 मिनट तक रहा। यह ऐसी खगोलीय घटना है जिससे धर्म और विज्ञान दोनों जुड़े हैं और दोनों की मान्‍यताएं इससे संचालित होती हैं। इस दौरान कई तरह की सावधानियां बरतना जरूरी होती हैं। खासतौर पर भोजन न करें, सोएं नहीं। कोशिश करें कि एक स्थान पर बैठकर भगवान का नाम जपें। जानिए धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार ग्रहण काल में सोने, खाने से लेकर अन्‍य कामों को लेकर दिनचर्या कैसी होना चाहिये।

ग्रहण के दौरान नींद में रहने वालों के घर एवं व्‍यापार में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नुकसान हो सकता है।इस दौरान यदि कोई व्‍यक्ति शरीर पर सुंगधित इत्र, तेल या परफ्यूम का छिड़काव करता है तो उसे त्‍वचा के रोग होने का डर रहता है। ग्रहण के सूतक के दौरान भोजन करना निषेध है। यदि आवश्‍यक है तो इस बात का पूरा ध्‍यान रखें कि स्‍वच्‍छता व पवित्रता भंग ना हो।

ग्रहण काल आरंभ होने एवं समाप्‍त होने के बाद संभव हो तो शुद्ध जल से स्‍नान करें। यह जल गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, मानसरोवर, तापी, बिंदु सरोवर आदि धार्मिक दृष्टि से पवित्र नदियों व जल संरचना का होना चाहिये।

ग्रहण को लेकर हर आयु, वर्ग में कौतूहल

सूर्य ग्रहण को लेकर सबके अपने मत हैं, विचार हैं, अनुमान हैं, कहीं रोमांच है तो कहीं जिज्ञासा। कहीं ज्‍योतिषीय गणना का कौतूहल तो कहीं मन में दबी कुछ आशंकाएं। सूर्य ग्रहण एक विराट घटना है जो सृष्टि को आंदोलित व समाज को प्रभावित करती है।

कंकण आकृति का दिखेगा सूर्य, 144 साल ऐसा संयोग

विश्‍व में यह ग्रहण पूर्वीय अफ्रीका, यूरोप, हिन्द महासागर में नज़र आएगा। भारत में यह खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। दक्षिण के कुछ प्रांतों में यह वलय आकार का दिखाई देगा, जबकि शेष राज्‍यों में इसे आंशिक रूप से ही देखा जा सकेगा। इस ग्रहण को लेकर खास बात यह है कि यह कंकण आकृति का होगा। यह संयोग 144 साल बाद आ रहा है।

(ज्‍योतिषीय अनुमान एवं मान्‍यताएं पंडित गणेश शर्मा से चर्चा के अनुसार)

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Posted By: Navodit Saktawat

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