शिव पुराण, विष्णु पुराण और गरुण पुराण हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। इन ग्रंथों में मनुष्य और इंसान के बारे में बहुत सारी बातें बताई गई हैं, जिनके बारे में आम आदमी को नहीं पता होता है। इन ग्रंथों में लिखी बातों का अनुसरण करके हम अपना जीवन सफल बना सकते हैं और धरती के साथ-साथ स्वर्गलोक में भी अपने कर्म बेहतर कर सकते हैं। गरुण पुराण में लिखा है कि अगर किसी व्यक्ति के पास तुलसी, गंगाजल, श्रीमद्भाग्वत गीता है और उसने अपने जीवन में दान किया है तो उसे दूसरे लोक में कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे व्यक्तियों की मौत ज्यादा दर्दनाक नहीं होती है।

गंगाजल

किसी भी व्यक्ति की मौत के समय आमतौर पर उसके मुंह में गंगाजल और तुलसी डाल दी जाती है। गंगाजल डालने से वह व्यक्ति पवित्र हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को यमलोक में दंड नहीं दिया जाता है।

तुलसी

अगर मरने वाले व्यक्तिय के घर में तुलसी का पौधा लगा हुआ है या मरने से पहले उसके माथे पर तुलसी की पत्तियां रख दी जाएं तो उस व्यक्ति को यमदंड नहीं मिलता है। ऐसे में वह व्यक्ति यमराज के प्रकोप से बच जाता है।

श्रीमद्भागवत गीता

धर्म ग्रंथ या श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से दुनिया की मोहमाया से हमें मुक्ति मिलती है। जब हम सांसारिक मोहमाया से मुक्त हो जाते तब हमारी आत्मा आसानी से शरीर को छोड़ पाती है और मृत्यू के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। जो लोग सांसारिक मोहमाया में उलझे रहते हैं। उनकी मौत आसानी से नहीं होती है और ऐसे लोगों को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है।

दान

हिंदू धर्म में मौत के समय मरने वाले व्यक्ति के हाथ से गाय दान करवाने की प्रथा है। ऐसा करने से प्राण आसानी से निकल जाते हैं और गौदान का पुण्य मिलता है। इसके चलते परलोक में कोई परेशानी नहीं होती है।

Posted By: Arvind Dubey

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