रामायण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें व्यक्ति के जीवन से जुड़ी बहुत सारी समस्याओं का समाधान मिलता है। इसका हर एक पात्र हमें कुछ न कुछ सीख जरूर देता है। रामायन के सबसे फेमस पात्र हनुमान की अगर हम बात करें तो उनके हर काम के पीछे कोई न कोई सीख व शिक्षा छिपी होती हैं। अगर आप अपने महत्वपूर्ण काम को सफलतापूवर्क अंजाम देना चाहते हैं तो अपने पक्ष में वातावरण बनाए।

कम ही लोग ये जानते होंगे कि हनुमान बहुत अच्छे वक्ता रहे हैं। रामायण में हनुमान ने लंका जलाने से पहले भरी सभा में रावण को अपने आने का उद्देश्य समझाया था। अपने इस विशेष गुण की वजह से हनुमान ने पूरी सभा को प्रभावित किया और अपने पक्ष में माहौल बनाया। हनुमान जी ने जो कहा और किया उसका असर संपूर्ण राक्षस कुल पर पड़ा।

लंका कांड के बाद जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए और हनुमान जी औषधि लेने चले गए तो किसी ने रावण को सूचना दे दी। रावण ने कालनेमि नामक राक्षस के पास जाकर हनुमान का रास्ता रोकने को कहा। इस पर राक्षस कालेनेमि ने सिर पीटते हुए कहा कि, जिसने तुम्हारे देखते-देखते पूरा नगर जला दिया, उसका रास्ता कौन रोक सकता है।

इस पूरे प्रसंग पर कवि तुलसीदास जी ने लिखा-


दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरू धुना।।

देखत तुम्हहि नगरू जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।

Posted By: Sushma Barange

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