रामप्रसाद बिस्मिल के बारे में एक घटना ऐसी है जो को चकित कर देती है। इस घटना के बारे में बिस्मिल जी ने खुद जिक्र किया था। उन्होंने एक जगह जिक्र किया कि मैं जब गिरफ्तार किया गया तो मेरे पास उस समय भी भागने का मौका था। जब मुझे कोतवाली लाया गया तो वहां पर निगरानी के लिए एक सिपाही को रखा गया था लेकिन उसकी आंख लग गई।

मुंशी ने उस सिपाही को जगाया और पूछा क्‍या तुम आने वाली आपत्ति के लिए तैयार हो। सिपाही समझ गया और उनके पैरों पर गिरकर बोला नहीं मुंशी जी आप भागे तो मैं गिरफ्तार हो जाऊंगा, बाल बच्‍चे भूखे मर जाएंगे। सिपाही के इतना कहते ही मुंशी जी को दया आ गई और मौका पाकर भी वह नहीं भागे।

रात में शौचालय का प्रयोग करने के लिए वह गए और उनकी सुरक्षा में तैनात सिपाही ने उनकी रस्‍सी खोल दी। ऐसे में उनकी सुरक्षा में तैनात दूसरे सिपाही ने कहा कि रस्‍सी मत खोलो तो पहले वाला सिपाही बोला मुझे विश्‍वास है कि वह भागेंगे नहीं।

मुंशी जी के दिमाग में एक बार आया कि यह सही मौका है लेकिन वह रुक गए जब वहां से उनके लिए भागना बहुत ही आसान था। उनके दिमाग में विचार आया कि जिस सिपाही ने मुझ पर इतना विश्‍वास किया है उसके साथ मैं विश्‍वास घात कैसे कर सकता हूं। ऐसी थी राम प्रसाद बिस्मिल की विश्‍वसनीयता और संवेदना।

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