National Youth Day 2021: घटना तब की है जब स्वामी विवेकानंद वृंदावन में थे। सड़क पर चल रहे थे। कुछ लाल मुंह के बंदर उनके पीछे पड़ गए। स्वामीजी भागने लगे। बंदर भी उन पर तेजी से आक्रमण करने लगे। तभी एक समझदार व्यक्ति ने कहा, भागो मत। इनके सामने डट कर खड़े रह जाओ। मुकाबला करो। स्वामीजी ने वैसा ही किया और बंदर भाग गए। इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए स्वामीजी अपने शिष्यों से कहते थे, जीवन में कठिनाइयां भी इन बंदरों की तरह होती हैं। कठिनाइयों से भागने पर वे बढ़ती हैं और सामना करने पर हल हो जाती हैं।

सेवक राजा के चित्र पर थूक न सका

खेतड़ी (राजस्थान) के महाराजा स्वामी विवेकानंद का बहुत सम्मान करते थे। स्वामीजी मूर्ति पूजा में विश्वास रखते थे, परंतु महाराज की सोच इससे ठीक विपरीत थी। एक बार महाराजा ने कहा, स्वामीजी मूर्ति में क्या ईश्वर होता है?

जिस कक्ष में यह चर्चा चल रही थी, उसमें महाराज का एक चित्र लगा था। स्वामीजी ने उनके नौकर से कहा, यह चित्र उतारो। नौकर ने ऐसा ही किया। इसके बाद स्वामीजी ने उससे कहा, इस चित्र पर थूक दो। सेवक यह दुस्साहस न कर सका।

इस पर स्वामीजी ने राजा से कहा, यह तो मात्र कागज का टुकड़ा है। इससे आपका अपमान नहीं होगा। फिर भी सेवक ने नहीं थूका। एक प्रकार से इस चित्र में आप पूरी तरह से विद्यमान हैं। इसलिए आपका यह श्रद्धालु-सेवक इसका अपमान नहीं कर सका। यही बात मूर्ति पूजा पर लागू होती है।

Posted By: Arvind Dubey

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