ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित है सौ से भी अधिक साल पुराना मांढरे की माता का मंदिर। शहर में ही पहाड़ी के ऊपर बने होने के कारण करीब 50-60 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर में जाना पड़ता है।

ग्वालियर देश के हर हिस्से से वायुमार्ग, रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा सिंधिया राजपरिवार द्वारा करवाई गई थी।

आस्था: आदिशक्ति श्री महाकाली अष्टभुजा महिषासुर मर्दिनी के इस मंदिर पर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। हर शुक्रवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि मूर्ति को आनंदराव मांढरे ने सपने में देखा और माता की आज्ञा से इसे महाराष्ट्र के सतारा से लाया गया था।

सिंधिया राजघराने के जीवाजीराव ने मंदिर बनवाया और आनंदराव की देखरेख में मूर्ति स्थापित की गई। मांढरे की चौथी पीढ़ी आज भी यहां पूजा कर रही है। दशहरा के दिन सिंधिया परिवार द्वारा मंदिर में विशेष रूप से शमी पूजन का आयोजन किया जाता है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए माता को चुनरी बांधते हैं।

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