सोनकच्छ (मध्य प्रदेश)। समीपस्थ ग्राम सांवेर में गार्डन परिसर में संगीतमय भागवत का आयोजन चल रहा है। कथा के छठे दिन भगवत आचार्य पंडित राजकृष्ण शास्त्री ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग भक्तों को सुनाया। कथा के दौरान प्रसंग सुनाया गया कि भगवान कृष्ण ने वृंदावन से जाकर मामा कंस का वध कर महाराजा अग्रसेन को रिहा कराया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कंस के अत्याचारों की सीमा अत्यधिक होने के बाद उसकी मृत्यु के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। उसका वध किया। उसी प्रकार जब संसार में बुराई अपनी सीमा से अधिक हो जाती है, तो सच्चाई को जीवित रखने के लिए भगवान धरती पर अवश्य जन्म लेते हैं। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का रुकमणि से विवाह संपन्ना कराया गया। इसके बाद भजनों की प्रस्तुति दी गई। महिलाओं ने भजनों नृत्य कर उत्सव मनाया। कथा में भागवत का भाव और उसका महत्व बताया।

कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रता का वर्णन होगा। श्रीमद् भागवत कथा में बड़ी संख्या में सोनकच्छ एवं सांवेर ग्रामीण क्षेत्र के भक्त सम्मिलत हुए। भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने आरती की। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष राम सोनी ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना की। साथ में मंडल अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहें।

भगवान भक्तों की लाज बचाने के लिए स्वयं पधार जाते हैं : मुरारी

नानी बाई का मायरा कथा के द्वितीय दिवस पंडित अनिरुद्ध मुरारी ने भगवान भक्तों की लाज बचाने के लिए स्वयं पधार जाते हैं। कथा दौरान विभिन्ना प्रसंग सुनाए गए। कथा के दौरान नानीबाई, कृष्णा, राधा एवं रुक्मणी रूपी नन्ही बालिकाएं मौजूद थीं। कथा का प्रारंभ भगवान लक्ष्‌मी नारायण एवं श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। कथा के विराम के पश्चात पंडित जी अनिरुद्ध मुरारी एवं संगीत मंडली के दिनेश सोलंकी, नरेश शर्मा नारायण शर्मा का पुष्पहार एवं शाल, श्रीफल से स्वागत किया गया। संचालन सौभाग सिंह ठाकुर एवं आभार प्रदर्शन प्रमोद भावसार ने किया।

'कथा श्रवण से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाएगा'

करनावद। ग्राम देहरिया साहू के हनुमान मंदिर में सात दिवसीय भगवत कथा कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुई। शुक्रवार सुबह मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा निकाली गई। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। दोपहर में श्रीमद् भगवत कथा में पंडित सावन शर्मा ने भगवत कथा में कहा कि कथा का श्रवण बढ़-चढ़कर करें, क्योंकि मानव जीवन मनुष्य को एक बार ही मिला है। इस जीवन से परमात्मा का भजन कीर्तन कर ले। जो भगवत कथा के माध्यम से ही होगा। इससे मनुष्य अपने जीवन को धन्य बनाएगा। कथा के अंत में व्यासपीठ की आरती उतारकर प्रसाद वितरण की गई।

Posted By: Arvind Dubey

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