अगर आप वास्‍तु शास्‍त्र की बात करें तो इसमें सबसे शक्तिशाली चीजें में एक दर्पण को माना गया है। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगाया जा सकता है कि "दर्पण" वास्तु शास्त्र में किसी भी प्रकार के वास्तु-दोष निवारण के लिए काफी उपयोगी माना गया है। दर्पण में अप्रत्याशित सौभाग्य, धन-संपत्ति, और घर में हर्षोल्लास लाने की क्षमता होती है। लेकिन यह भी माना जाता है कि अगर इसका प्रयोग घर के सही स्‍थान पर नहीं किया गया है तो यह नकारात्‍मकता को भी उतनी ही शक्ति से बढ़ाता है। दर्पण जितना भाग्‍य को आकर्षित करता है उतना ही दुर्भाग्‍य को भी। आइए आपको बतातें है इसकी सावधानियों के बारे में-

- तिजोरी के सम्मुख रखा दर्पण धन में दिन दुगुनी, रात चौगुनी वृद्धि करता है।

- घर में खाने की डाइनिंग टेबल के सम्मुख रखा दर्पण घर में अखंड धन-धान्य का कारक होता है।

- प्रयास करें कि दर्पण जिस भी दीवार पर लगायें, फर्श से उसकी ऊंचाई 4 से 5 फीट हो।

- घर में यथासंभव चौकोर या आयताकार शीशा ही लगायें।

- दर्पण को घर की उत्तर और पूर्व दिशा की दीवार पे लगाना सबसे उत्तम रहता है।

- अपने ड्रेसिंग टेबल में एक बड़ा शीशा लगाये और इसे अपने बिस्तर के साइड में लगाये ताकि सोते समय आप शीशे में ना दिखें। ऐसा करना शुभ माना जाता है।

- यदि आपके घर का कोई कोना कटा हुआ है तो उस दिशा में शीशा लगा दें, इससे उस कोने का वास्तु दोष समाप्त हो जायेगा।

- घर के खिड़की और दरवाजों के शीशे कभी भी पारदर्शक नहीं होने चाहियें।

- कदापि भी दो दर्पण एक दुसरे के सम्मुख नहीं लगाने चाहियें, इससे उर्जा अनियंत्रित होती है।