इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के पूर्वी क्षेत्र स्थित बजरंग नगर में रविवार को हजारों वैष्णवों ने भगवान सर्वेश्वर के चने के दाल बराबर स्वरूप के दर्शन किए। हाथों में फूलमालाएं और पूजन की थाल लिए कतार में लगे श्रद्धालु श्रीजी महाराज की जय और भगवान सर्वेश्वर की जय के जयघोष लगा रहे थे। भगवान को इत्र से भीगी रूई में विराजित कर मेग्नीफाई ग्लास के माध्यम से भगवान के छोटे स्वरूप के दर्शन का क्रम करीब ढाई घंटे चला।

इससे पहले विधि-विधान से सुबह 5.30 बजे भगवान की मंगल आरती कराई गई। इसके बाद अभिषेक और दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। इस मौके पर निम्बाकाचार्य श्यामशरणदेवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान की यह प्रतिमा 5110 साल प्राचीन है। शालिगराम पत्थर से निर्मित इस मूर्ति में राधा-कृष्ण की छवि नजर आती है। इसकी इन विशेषताओं के कारण भगवान के इस अनूठे स्वरूप की ख्याति दुनियाभर में है।

लक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान पर धनुर्मास में आयोजित गोपी गीत कार्यक्रम में दोबारा आएंगे। अभा श्रीनिम्बाका संप्रदाय के प्रचार प्रमुख गोविंद राठी ने बताया कि झेड प्लस सुरक्षा के बीच शनिवार रात भगवान का आगमन हुआ। उनके साथ 20 सेवादारों का दल भी था। आज सुबह दर्शन के बाद निम्बाकाचार्यजी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग भी गए। इसके बाद शाम को गीता, गुमाश्ता नगर और उषानगर, द्वारकापुरी में पदरावनी के बाद सेंधवा के लिए काफिल रवाना हुआ।

शहर के भक्तों को भगवान सर्वेश्वर की चने के दाल के आकार की मूर्ति के दर्शन रविवार को होंगे। सबसे पहले उनका अभिषेक, पूजन सुबह 7.45 बजे 384, बजरंग नगर में होगा। यहां भक्तों के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन सुबह 10.30 बजे तक होंगे। इसके बाद शालिगराम पत्थर की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज 5110 वर्ष पुरानी मूर्ति को लक्ष्मी-वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग ले जाया जाएगा।

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket