विजय राठौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बृहस्पति स्व राशि धनु की यात्रा खत्म करके मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। किसी भी राशि में बृहस्पति का गोचर लगभग 12 वर्षों में एक बार होता है, इसलिए इसके राशि परिवर्तन को ज्योतिष ग्रंथों में विशेष महत्व दिया गया है। ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार फलित ज्योतिष में अनेकों अप्रत्याशित फल प्रदान करने के लिए विख्यात ग्रह बृहस्पति स्व राशि धनु की यात्रा समाप्त करके 20 नवंबर को दोपहर 1:20 बजे अपनी राशि से निकलकर मकर राशि में चले जाएंगे।

मकर राशि में पहले से ही शनि मौजूद हैं। जो 6 अप्रैल 2021 तक गुरु और शनि मकर राशि में ही रहेंगे। 6 अप्रैल से 13 सितंबर के मध्य गुरु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। वहीं 20 जुलाई से वक्री अवस्था में भ्रमण करते हुए पुन: 14 सितंबर को मकर राशि में वापस आ जाएंगे 20 नवंबर 2021 को यह अगली राशि कुंभ में प्रवेश कर जाएंगे। इस प्रकार एक वर्ष तक वक्री मार्गी अवस्था में गोचर करते हुए जातकों पर सर्वाधिक प्रभाव डालेंगे।

शनि का अपनी ही राशि में होना और उसके साथ गुरु का होना नीच भंग राजयोग बना रहा है। बृहस्पति नीच राशि में आने के बाद अनिष्ट फल तो नहीं देगा, लेकिन उसके शुभ प्रभाव में कमी जरूर होगी। ग्रह की यह युक्ति बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। लंबे समय से जो लोग प्रमोशन के इंतजार में थे उनको स्थान परिवर्तन मिलने के संकेत मिल सकते हैं। देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा, साथ ही शिक्षा क्षेत्र में कई तब्दीलियां होंगी। इसके साथ आइटी क्षेत्र में फिर से उछाल आएगा। राजनीति से जुड़े लोगों का जनता सहयोग करती दिखेगी। मौसम में बदलाव के साथ ठंडक बढ़ेगी।

-गुरु के राशि परिवर्तन से 12 राशियों पर क्या रहेगा प्रभाव

Posted By: anil.tomar

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