Shanichari Amavasya 2022: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भाद्रपद अमावस्या या भादो अमावस्या कहा जाता है। यह अमावस्या पितृ पक्ष के पहले आती है। इस अमावस्या पर दान-पुण्य करना, तर्पण व पिंडदान आदि कार्य करना बेहद ही शुभ माने जाते हैं। मान्यता है कि यह दिन पितृ दोष, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए खास होता है। इस साल भाद्रपद अमावस्या 27 अगस्त शनिवार को मनाई जा रही है। शनिवार के दिन पड़ने वाली इस अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में शनिश्चरी अमावस्या का दिन शनि की महादशा से पीड़ित राशियों के लिए खास होता है। इस दिन शनि साढ़ेसाती और शनि ढैय्या से पीड़ित राशियों के लोग कुछ उपाय कर शनिदेव के अशुभ प्रभावों को कम कर सकते हैं।

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित राशियां

इस समय शनिदेव मकर राशि में वक्री अवस्था में विराजमान हैं। ऐसी स्थिति में धनु, मकर और कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। वहीं मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है। शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से पीड़ित राशियों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित जातकों को शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनिश्चरी अमावस्या के दिन सरसों के तेल से शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही काली उड़द दाल से बनी इमरती प्रसाद के रूप में अर्पित करें।

शनिश्चरी अमावस्या के एक दिन पहले यानी की शुक्रवार को सवा पाव काली उड़द की दाल को एक कपड़े में बांध लें। साथ ही इसकी पोटली को अपने पास रात भर रखकर सो जाएं। ध्यान रखें कि आप अकेले ही सोएं। शनिश्चरी अमावस्या के दिन इस दाल की पोटली को किसी शनि मंदिर में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

शनिश्चरी अमावस्या के दिन एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति तो दान कर दें। या फिर शनि मंदिर में कटोरी सहित तेल रख आएं। इसके साथ ही पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। माना जाता है कि यह उपाय कम से कम पांच शनिवार करने से शनि दोष में काफी लाभ मिलता है।

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Posted By: Arvind Dubey

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