पिछले महीने 29 अप्रैल को शनि महाराज का महागोचर हुआ। 30 साल बाद उन्होंने स्व राशि कुंभ में प्रवेश किया। इसके साथ ही कुछ राशियों से साढ़े साती उतर गई और कुछ पर आरंभ हो गई है। अब कर्म फल प्रदाता शनि महाराज सभी को उनके कर्मों के अनुसार फल देंगे। उनके इस महा गोचर से पंच महापुरुष योग का भी निर्माण हुआ है। इसका अब पूरी सृष्टि पर असर पड़ेगा। यदि व्यक्ति अपने जीवन में शुभ कर्म करता है तो उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। जब गलत कर्म करता है तो शनि देव उसे अपनी साढ़ेसाती, ढैया या महादशा में कर्म के अनुसार फल और प्रदान अवश्य करते हैं। शनिदेव की तीन स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है जब वे नीच राशि मेष में होते हैं, जब तुला राशि में गोचर करते हैं तथा जब वे स्व राशि मकर व कुम्भ में होते है। शनि देव मूल कुंडली में जिस स्थिति में होते हैं, उसी प्रकार का फल प्रदान करते हैं। जानिये किस पर क्‍या असर होगा।

कुम्भ :- कुंभ लग्न एवं राशि वालों के लिए शनि देव लग्नेश एवं राशि के स्वामी होने के कारण शुभ फलदायक के रूप में कार्य करते हैं। हालांकि वे व्यय के कारक भी हैं फिर भी लग्नेश होने के चलते शुभ फल प्रदायक के रूप में ही साबित होते हैं। स्वराशि के होकर अब चूंकि वे यहां गोचर करने कर रहे हैं। इसलिए यहां शश नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण होगा। इससे बहुत लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में परिवर्तन कार्यस्थल पर उत्साह का वातावरण बनेगा। कार्य क्षमता में बहुत अच्छी वृद्धि होगी नौकरी या व्यवसाय के लिए प्रयासरत लोगों के लिए नए अवसर का संयोग बनेगा। मूल कुंडली के अनुसार शनिदेव का उपाय शुभ फल प्रदायक होगा। हनुमान जी की पूजा आराधना इस अवधि में शुभ फल कारक साबित होगा।

मीन :- मीन लग्न एवं मीन राशि वालों के लिए शनि देव का यह राशि परिवर्तन व्यय भाव में हुआ है। मीन लग्न एवं मीन राशि के लिए शनि महाराज आय एवं व्‍यय के कारक होने के कारण ज्यादा शुभ फल प्रदायक नहीं हैं। लाभेश होने के चलते कारोबारी गतिविधियों में सकारात्मक तरक्‍की भी कराते हैं। इनका परिवर्तन कुंभ राशि व्यय भाव पर ही देखा जाएगा। दूसरी तरफ देखा जाए तो व्ययेश का व्यय भाव में होना विपरीत राजयोग का निर्माण भी कराता है। ऐसे में गोचर कर रहे शनि महाराज कारोबारी गतिविधियों को लेकर के खर्च भी करा सकते हैं।

क्‍या होता है पंच महापुरुष योग

यह 5 ग्रहों की वजह से होता है बृहस्पति मंगल शुक्र शनि और बुध इन पांच ग्रहों से यह पंच महापुरुष योग बनता है। जो ग्रह स्वराशि में उच्च का होकर केंद्र में विराजमान होता है तो उसे पंच महापुरुष योग कहा जाता है। पंच महापुरुष योग फल कैसे देता है और इसी यह नाम क्यों दिया गया है, इसके बारे में भी जान लीजिये। जब यह योग बनता है तब उस व्यक्ति के कुंडली में महापुरुष के जैसे योग बनते हैं ग्रहों के अनुसार और उस समय वह व्यक्ति महापुरुष के समान काम करने लगता है।

इसलिए इसे पंच महापुरुष योग कहा जाता है। यह ग्रहों का जो गुण है उस व्यक्ति में ज्यादा एक्टिव होता है उन ग्रहों के जो भी चीजें हैं उन चीजों में बढ़ोतरी देता है। उसके जीवन में ऊंचाई भी देता है। जब पंच महापुरुष योग बनता है उस समय अगर उस व्यक्ति के कुंडली में अगर वही ग्रह ज्यादा उच्च के है प्रभावशाली है तो यह योग उसको ज्यादा प्रभावित करता है। अगर उन ग्रहों की डिग्री अगर अच्छी हो अच्छी प्लेसमेंट हो तो और ज्यादा परिणाम कारक देता है।

पंच महापुरुष योग - ज्योतिष में 5 शक्तिशाली योग के लिए जानकारी

हम सभी निश्चित रूप से चाहते हैं कि आकाश के ग्रह हर समय हमारी तरफ रहें। हम नहीं? वैदिक ज्योतिष उन्हें 'योग' कहते हैं। आपकी कुंडली में योग और कुछ नहीं बल्कि ग्रहों की अनुकूल स्थिति और संयोजन है।

यहां, हम उन पांच ग्रहों के बारे में बात कर रहे हैं जो आपकी कुंडली में कुछ सबसे शक्तिशाली योग बनाते हैं।

मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि और शुक्र द्वारा निर्मित पंच महापुरुष योग ज्योतिष में सबसे प्रतिष्ठित योगों में से कुछ हैं। नाम में, पंच (पंच) का अनुवाद पाँच और महापुरुष का अर्थ पाँच शक्तिशाली ग्रहों से है। प्रत्येक ग्रह योग के एक उप-वर्ग के लिए जिम्मेदार है और वे आपकी मदद कैसे करते हैं और वे अपने साथ आपके जीवन में क्या लाते हैं? चलो पता करते हैं।

क्या आप इनमें से किसी योग के प्रभाव में हैं? इसका पता लगाने का एक आसान तरीका है। भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषियों द्वारा अपनी व्यक्तिगत जन्मपत्री का विश्लेषण करवाएं, और आज ही पता करें।

ज्योतिष में पंच महापुरुष योग कैसे बनता है?

जैसा कि ऊपर कहा गया है, पंच महापुरुष योग आपके जन्म चार्ट में इन ग्रहों में से किसी एक के अनुकूल स्थान के साथ बनता है: मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि और शुक्र। योग तब बनता है जब इनमें से एक ग्रह अपनी ही राशि में स्थित है। उन्हें एक केंद्र (प्रथम, चौथा, सातवां, दसवां घर) या त्रिकोण (प्रथम, पांचवां, नौवां घर) की उच्च राशि में रखा गया है।

इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करके ये पांच ग्रह पांच योग बनाते हैं।

बृहस्पति के साथ हंसा योग

बुध के साथ भद्र योग

शुक्र द्वारा मालव्य योग

मंगल द्वारा रुचक योग

शनि द्वारा शश योग

जिस ग्रह के साथ वे बने हैं, उसके आधार पर, इनमें से प्रत्येक पंच महापुरुष योग जातक के जीवन में कुछ अलग लाता है। ऐसे शक्तिशाली और प्रभावशाली ग्रहों के साथ, पंच महापुरुष योग सबसे शुभ और लाभकारी योगों में से एक है। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनमें यह योग आपकी मदद कर सकता है, उनमें से सबसे प्रमुख धनवान, बुद्धिमान, दूरदर्शी और कुशल हैं।

Posted By: Navodit Saktawat

  • Font Size
  • Close