वाराणसी। इस बार श्रावण पूर्णिमा दो दिन यानी 14 और 15 अगस्त को पड़ रही है। पहले दिन 14 अगस्त को व्रत की पूर्णिमा और दूसरे दिन यानी 15 अगस्त को रक्षा बंधन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ही पूर्णिमा का स्नान-दान होगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी ने बताया, रक्षा बंधन में पराह्यण व्यापिनी तिथि ली जाती है। यदि पूर्णिमा दो दिन हो या उस दिन भद्रा हो तो उसका त्याग करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा में रक्षा पर्व और फागुनी दोनों ही वर्जित है।

श्रावणी में राजा और फागुनी में प्रजा का अनिष्ट होता है। पूर्णिमा तिथि 14 अगस्त को दिन में ही 2.45 बजे लग रही है जो 15 अगस्त को शाम 4.30 बजे तक रहेगी। 15 अगस्त को सुबह से लेकर शाम 4.23 बजे तक बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।

वहीं श्रावण पूर्णिमा पर ब्राह्मणों द्वारा ऋषि तर्पण क्रिया उपाकर्म किया जाता है। 15 अगस्त को संस्कृत दिवस व स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जाएगा। इस दिन काशी में अमरनाथ यात्रा के साथ पूजन-अर्चन का भी विधान होता है।

रक्षाबंधन की कथा

सतयुग में एक बार देवता और दानवों में 12 वर्ष तक युद्ध हुआ। देवता बार-बार हारते चले गए। देव गुरु वृहस्पति की आज्ञा से युद्ध रोक दिया गया। देव गुरु के आदेश पर इंद्राणियों ने इंद्र को रक्षा बंधन किया। रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र ने दानवों का संहार किया और देवताओं को विजय मिली। यह तिथि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा थी। तभी से सनातन परंपरा में रक्षा बंधन मनाया जा रहा है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को और ब्राह्माण अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांध कर एक वर्ष के लिए सुरक्षित कर देते हैं।

रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र ''येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबलः। तेनत्वां बद्धनामि रक्षे माचल माचल॥''