कुछ चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी जाती हैं। जानें वे क्या हैं और क्यों वर्जित है

सिंदूर या कुमकुम

शिवपूजा में शास्त्रों में शिवलिंग पर कुमकुम और रोली चढ़ाना निषेध माना गया है। भोलेनाथ वैरागी है ऐसे में संहारकर्ता की सिंदूर से पूजा करना अशुभ माना जाता है। बल्कि चंदन से उनकी पूजा की जाती है।

तुलसी

यूं तो तुलसी अत्यधिक पवित्र मानी जाती है लेकिन भगवान शिव पर तुलसी चढ़ाना निषिद्ध है। दरअसल ऐसी मान्यताएं है कि शिवजी ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था, ऐसे में तुलसी शिवजी को नहीं चढ़ाई जाती। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने तुलसी को पत्नी रूप में स्वीकार किया। इस कारण तुलसी दल शिव को अर्पित नहीं किया जाता।

शंख

भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण शिव को शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता।

श्रावण माह का महत्व

दरअसल दक्ष पुत्री सती ने अपने जीवन को त्याग कर दोबाराहिमालय के राजा के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने पूरे श्रावण माह में कठोर तप किया। पार्वती की भक्ति से शिवजी प्रसन्ना हुए और उनकी मनोकामना पूरी की। इस वजह से शिवजी को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है।

श्रावण के सोमवार का महत्व

सोमवार का प्रतिनिधि ग्रह चंद्रमा है, जो कि मन का कारक है। चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजित है। भोलेबाबा स्वयं साधक और भक्त के मन को नियंत्रित करते हैं। यही कारण है कि सोमवार का दिन शिवजी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। जिसमें श्रावण के सोमवार पर शिवलिंग की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सभी भगवान शिव को प्रसन्ना करने के लिए व्रत रखती है।

Posted By: Lav Gadkari