सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या व शनिवार का संयोग इस मानसून में धरती को तरबतर करने का संकेत दे रहा है।

ज्योतिषियों की मानें तो शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने के तीन-चार दिन पहले से मौसम में बदलाव होना शुरू होता है और बारिश के साथ तेज हवा चलती है, जिससे बारिश किसी एक जगह पर नहीं, बल्कि हर दिशा में होती है।

इस बार शनि अमावस्या के बाद सावन के महीने में चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र भी पड़ रहा है, जो बारिश का कारक माना जाता है। ग्रह नक्षत्रों का यह संयोग पृथ्वी के अधिकांश भाग को जलमग्न कर देगा और खेत-खलिहानों में पानी ही पानी दिखाई देगा।

सावन माह की शुरुआत सूर्य प्रधान नक्षत्र से हुई थी और इसके अगले ही दिन चन्द्र प्रधान नक्षत्र का संयोग बना था, जिसके चलते सावन माह के शुरू होते ही झमाझम बारिश से लोगों के चेहरे खिल गए थे। पिछले दो दिन से हो रही मूसलाधार बारिश का कारण भी शनि अमावस्या व सूर्य, चन्द्र प्रधान नक्षत्रों के आगमन का संकेत है।

हालांकि जिस दिन शनि अमावस्या पड़ेगी, उस दिन से लेकर अगले छह दिनों तक यानी 30 जुलाई तक बारिश में कमी आएगी, किन्तु जैसे ही 2 अगस्त को चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र पड़ेगा वैसे ही फिर जोरदार बारिश होगी, जो पूर्णिमा तक यानी 10 अगस्त तक होगी।

लंबे समय से ग्रस्त रोग से मुक्ति

ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे( रायपुर) के अनुसार 26 जुलाई को शनिवार और अमावस्या एक साथ पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के कर्क राशि में होते हुए शनि अमावस्या का पड़ना विशेष फलदायी माना जाता है। सूर्य जब भी कर्क राशि में होता है तो वह दक्षिणायन का होता है।

साथ ही इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र है जो गुरु प्रधान है। ऐसी परिस्थिति में अंधेरी रात के दिन शनिवार का होना संकेत देता है कि जो लोग बहुत लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में घिरे हैं अथवा जिनका व्यवसाय काफी मेहनत करने के बाद भी फलीभूत नहीं हो रहा है, उनके लिए शनि अमावस्या शुभ फल प्रदान करेगी।

संतान से दुखी माता-पिता को राहत

शनि अमावस्या गुरु प्रधान नक्षत्र के रहते पड़ रही है, इस दिन यदि मां दुर्गा की आराधना की जाए तो घर के वास्तु संबंधी समस्याओं के साथ, पारिवारिक शांति व संतान संबंधी समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा। माता-पिता यदि संतान की मनमानी या व्यवहार से दुखी हों तो इस दिन की गई आराधना से उनके संकट का निवारण होगा।

किसान पूजेंगे हल, हंसिया, कुदाल

शनि अमावस्या को छत्तीसगढ़ में हरेली अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन जहां किसान अपने बैलों के साथ कृषि-यंत्रों हल, कोपर, कुदाल, बसला, हंसिया आदि की पूजा-अर्चना करेंगे वहीं छत्तीसगढ़ की परंपरा के अनुसार अपने घर को बुरी नजर से बचाने के लिए लोगबाग घरों में नीम की टहनी लगाएंगे। बच्चे बांस की बनी गेड़ी में चढ़ने का खेल खेलेंगे।