रायपुर। Gochar February 2023: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य और शनि ग्रह को पिता-पुत्र माना जाता है। सूर्य को यश, मान, सम्मान, समृद्धि दिलाने वाले देव और शनिदेव को कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता के रूप में पूजने की परंपरा है। ये दोनों ग्रह अगले साल 13 फरवरी 2023 को कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कुंभ राशि में दोनों ग्रहों के एक साथ विद्यमान होने का संयोग 1993 में बना था। अब लगभग 30 साल बाद पिता सूर्य और पुत्र शनि ग्रह एक साथ कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। इससे अनेक राशि के जातकों को विशेष लाभ होगा। खासकर वृष, मिथुन, कन्या, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए खास रहेगा।

ज्योतिषाचार्य डा. दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य और उनके पुत्र न्याय के देवता शनिदेव कुंभ राशि में 13 फरवरी से 14 मार्च तक रहेंगे। कुंभ शनि की मूल त्रिकोण राशि भी है। अगले साल कुंभ राशि में विद्यमान होकर शनिदेव छह राशि कन्या, मकर, धनु, कुंभ, वृष, मिथुन राशि के जातकों को समृद्धि प्रदान करेंगे। इन राशि के जातकों के न्यायालयीन प्रकरणों का समाधान होगा।

साढ़ेसाती और ढैय्या

फिलहाल, शनिदेव मकर राशि में है और मिथुन, तुला राशि के जातकों पर ढैय्या चल रही है। दूसरी ओर मकर, कुंभ, धनु राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का प्रभाव है। शनि जब अगले साल 17 जनवरी 2023 को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब तुला, मिथुन राशि से ढैय्या समाप्त हो जाएगी। साथ ही धनु राशि के जातकों को साढ़ेसाती के प्रकोप से मुक्ति मिलेगी।

कर्क-वृश्चिक राशि पर ढैय्या

अगले साल 17 जनवरी 2023 से कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। इसके अलावा मकर राशि पर साढ़े साती अंतिम चरण में रहेगी। कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव बीच वाले चरण में होगा। मीन राशि पर साढ़ेसाती की शुरुआत होगी।

ऐसे करें शनिदेव को खुश

- ॐ हं हनुमते नम: का जाप करें

- पीपल पर जल अर्पित करके पितरों को याद करें

- शनिवार को निर्धनों की सहायता करके शनि प्रतिमा पर तेल अर्पित करें

- राजा दशरथ के शनि स्त्रोत का पाठ करें

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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