एक दूसरे से उधार लेन-देन करना हमारे लिए एक सामान्य बात है। सबसे ज्यादा पैसों का ही लेन-देन किया जाता है। लेकिन कुछ ऐसी भी वस्तुएं हैं जिन्हें उधार लेने पर आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह लेन-देन आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, वित्तीय अस्थिरता और कई अन्य बड़ी समस्याएं दे सकता है। आइये जानते हैं उन सभी चीजों के बारे में जो किसी से उधार नहीं लेना चाहिए।

घड़ी

ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि अपनी घड़ी किसी का न देना चाहिए न ही किसी की घड़ी आपको पहनना चाहिए। ऐसा करने पर आपके व्यापारिक जीवन पर नकारात्मक असर होगा साथ ही आपको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पेन

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, कभी किसी व्यक्ति से पेन उधार नहीं लेना चाहिए न ही किसी को उधार देना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में वित्तीय अस्थिरता पैदा होती है। पेन दान करना या किसी को उधार देना का सीधा अर्थ है आप अपने कर्म को भी किसी के साथ साझा कर रहे हैं।

शादी के लिए पैसा

हमारे देश में शादी-विवाह में लोग सबसे ज्यादा उधारी करते हैं। लेकिन आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। शादी की व्यवस्था हमेशा खुद के पैसों से करना चाहिए। शादी के लिए उधार धन नहीं लेना चाहिए। ज्योतिष मान्यता है कि वित्तीय कर्ज के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत करना बुरा माना जाता है। इसलिए ऐसा करने से बचें।

इस्तेमाल किए गए कपड़े

अक्सर देखा जाता है कि घरों में लोग अपने रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ कपड़ों का साझा करते हैं। लेकिन आपको ऐसा करने से सावधान रहना चाहिए। ज्योतिष मान्यता के अनुसार , ऐसा कहा जाता है कि आपको दूसरों से कपड़े उधार लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपके लिए दुर्भाग्य ला सकता है। कपड़े का संबंध शुक्र से है। किसी अन्य के कपड़े पहनने से आपका शुक्र ग्रह कमजोर हो सकता है।

पुस्तकें

पुस्तकें किसी से साझा नहीं करना चाहिए। खासकर ऐसी पुस्तकें जिन्हें आप पहले से पढ़ रहे हैं। यदि कोई आप से वही पुस्तक मांगे तो आप बाजार से खरीदकर उसे नई पुस्तक दे सकते हैं। पुस्तकें ज्ञान की वाहक मानी जाती हैं। पुस्तकें साझा करना आपके भाग्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

Posted By: Navodit Saktawat

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