Kaal Sarp Dosh Upay: मानव जीवन कई सारी परेशानियों से भरा होता है, दिक्कत तो तब होती है जब एक परेशानी खत्म नहीं हो पाती और दूसरी परेशानी दस्तक देने के लिए द्वार पर खड़ी रहती है। ऐसे में समझ नहीं आता कि ऐसा क्या किया जाए जिससे इन परेशानिायों से निजात मिल जाए। अगर आप भी कुछ इस प्रकार की समस्या से जूझ रहे हैं तो ज्योतिषशास्त्र आपको इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने का उपाय बताता है। मानव जीवन में चल रही समस्याएं उसकी कुंडली पर आधारित होती हैं। कुंडली में दोष की वजह से ही मानव को अपने जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्ही दोषों में एक दोष कालसर्प दोष भी है, जो तब बनता है जब कुंडली में सारे ग्रह राहु केतु के बीच में आ जाते हैं तब काल सर्प योग बनता है। चलिए आज हम यहां पर कुंडली में बन रहे कालसर्प योग के दोष से मुक्ति पाने के उपाय के बारे में जानेंगे।

नागपंचम के दिन पाएं कालसर्प दोष से मुक्ति

अगर आपकी कुंडली में भी इस प्रकार का योग बन रहा है तो इससे मुक्ति पाने का सबसे अच्छा समय अब बहुत ही नजदीक है। दरअसल नागपंचमी का दिन काल सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे उपयुक्त दिन माना गया है। इस साल नागपंचमी 13 अगस्त को दस्तक देने जा रही है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति काल सर्प दोष से पीड़ित होता है उसकी तरक्की के रास्ते में हमेशा बाधाएं आती रहती हैं। कड़ी मेहनत के बावजूद भी उसे सफलता नहीं मिल पाती। चलिए अब जानते हैं कि नागपंचमी के दिन ऐसे कौन से उपाय करें कि हमें कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाए।

  1. सबसे पहला उपाय यह है कि नागपंचमी के दिन किसी सपेरे से नाग-नागिन का एक जोड़ा खरीद लें और उस जोड़े को ले जाकर जंगल में छोड़ दें। ऐसा माना गया है कि ऐसा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
  2. नागपंचमी के दिन जातक को कालसर्प दोष शांति की पूजा करानी चाहिए। पूजा के बाद चांदी से बने नाग-नागिन के जोड़े को किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। इसके अलावा कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए अपने वजन के समान का कोयला खरीदकर उसे भी बहते पानी में प्रवाहित कर दें।
  3. किसी ऐसे मंदिर के शिवलिंग की तलाश करें जहां नाग स्थापित न हो और वहां पर पंच धातू का नाग लगवा दें। फिर उस शिवलिंग का जल या फिर दूध से अभिषेक करते हुए नाग देवता से कालसर्प दोष से मुक्ति पाने की प्रार्थना करें।
  4. नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करें इसके बाद नाग गायत्री मंत्र:ओम नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्' का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद उनसे कालसर्प दोष से मुक्ति पाने की प्रार्थना करें।

Posted By: Shailendra Kumar