Vastu Tips For North East Direction। वास्तु शास्त्र में घर के हर कोण के बारे में विस्तार से बताया गया है और उसके महत्व को समझाया गया है। वास्तु शास्त्र ऊर्जा चक्र के सिद्धांत पर काम करता है और घर में रहने वाले सभी लोगों पर इससे निकलने वाली नेगेटिव और पॉजिटिव एनर्जी का असर होता है। ऐसे में घर की हर दिशा के लिए बनाए गए कुछ वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो अपने जीवन में होने वाली अशुभ घटनाओं को कम किया जा सकता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि आपको जीवन में शांति रखना है तो घर के उत्तर-पूर्व दिशा में कुछ चीजों को बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं वे चीजें -

धन संपदा की मानी जाती है उत्तर दिशा

वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर की उत्तर दिशा धन-संपदा की मानी जाती है और पूर्व दिशा में देवी-देवता वास करते हैं। यही कारण है कि उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण के नाम से जानते हैं। ईशान कोण में मंदिर बनाना काफी शुभ होता है।

उत्तर-पूर्व दिशा में न रखें इलेक्ट्रॉनिक चीजें

ईशान कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं रखना चाहिए। फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन जैसे उपकरण नहीं रखना चाहिए क्योंकि यह चीजें ऊर्जा से ही चलती है। इनकी गर्मी के कारण रिश्तों पर भी इसका असर पड़ता है।

उत्तर-पूर्व में न रखें जूते-चप्पल

घर की उत्तर-पूर्व दिशा में जूते-चप्पल भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये गंदगी को दर्शाते हैं। इससे मां लक्ष्मी के साथ अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता है। घर में धन का आगमन भी प्रभावित होता है। आर्थिक तंगी का सामना बनता है।

उत्तर-पूर्व दिशा में न रखें भारी समान

उत्तर-पूर्व दिशा में भारी चीजें बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा मशीन या फिर फर्नीचर जैसे भारी सामान नहीं रखना चाहिए। ईशान कोण में सीढ़ियां भी नहीं बनवानी चाहिए। ईशान कोण में शौचालय न बनाएं। इससे घर में नेगेटिव एनर्जी आने लगती है जो घर में रहने वाले लोगों की तरक्की में रुकावट का कारण बनती है।

उत्तर-पूर्व दिशा में रखें ये चीजें

वास्तु के मुताबिक घर की उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर बनाना शुभ होता है। इस दिशा में भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति रखना शुभ माना जाता है। अगर आप पेड़-पौधे लगाना चाहते हैं तो भी शुभ होता है। इस दिशा में मनी प्लांट, तुलसी जैसे पौधे लगा सकते हैं।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

Posted By: Sandeep Chourey

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